मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

जिन्हें न शर्म लेश


बहुत बार देखी  हैं
       हथेली की रेखाएं
किताबों में लिखा
     जिन्हें सर्वश्रेष्ठ ,
उमर आधे से ज्यादा
    है बीत गयी
खोया ही खोया
    पाया बस क्लेश ,
नहीं कोई चाहत
      है अब पाल रखी
नहीं लेना दुनिया से
     है कुछ विशेष ,
सुकूँ से बिता लें
      सम्मान से रह लें
जो चार दिन इस
    जहाँ में अवशेष ,
मगर लगता लड़ना व्
      भिड़ना पड़ेगा
सबक दे दें उनको
     जिन्हें न शर्म लेश .

शालिनी कौशिक
  (कौशल)


कोई टिप्पणी नहीं:

मीरा कुमार जी को हटाया क्यों नहीं सुषमा जी ?

विपक्षी दलों ने जब से भाजपा के राष्ट्रपति पद के दलित उम्मीदवार श्री रामनाथ कोविंद के सामने दलित उम्मीदवार के ही रूप में मीरा कुमार जी...