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जीएसटी ने मारा धक्का ,मुंह खोले महंगाई खड़ी .....

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वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे ,
जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे .
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पूजन मात्र आराधन से मात विराजें कभी नहीं ,
होत कृपा जब गृहलक्ष्मी को हम सम्मान दिलायेंगें .
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आतिशबाजी छोड़-छोड़कर बुरी शक्तियां नहीं मरें ,
करें प्रण अब बुरे भाव को दिल से दूर भगायेंगे .
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चौदह बरस के बिछड़े भाई आज के दिन ही गले मिले ,
गले लगाकर आज अयोध्या भारत देश बनायेंगे .
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सफल दीवाली तभी हमारी शिक्षित हो हर एक बच्चा ,
छाप अंगूठे का दिलद्दर घर घर से दूर हटायेंगे .
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जीएसटी  ने मारा धक्का मुहं खोले महंगाई खड़ी ,
स्वार्थ को तजकर मितव्ययिता से इसको धूल चटाएंगे .
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तैमूर -आराध्या! प्लीज़ हमें रोटी दे दो .

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कैराना -मोदी-योगी को घुसने का मौका

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पलायन मुद्दे के शोर ने कैराना को एकाएक चर्चा में ला दिया ,सब ओर पलायन मुद्दे के कारण कैराना की बात करना एक रुचिकर विषय बन गया था ,कहीं चले जाओ जहाँ आपने कैराना से जुड़े होने की बात कही नहीं वहीं आपसे बातचीत करने को और सही हालात जानने को लोग एकजुट होने लगते ,उन्हीं दिनों मुझे भी आयोग के समक्ष एक साक्षात्कार  में जाने का अवसर मिला तो बोर्ड के सदस्यों ने यह जानते ही कि मैं कैराना में वकालत करती हूँ ,मुझसे पहला प्रश्न यही किया ''कि कैराना पलायन मुद्दे की वास्तविकता क्या है ?'' अब सच क्या है ये मैं यहाँ अपने विचारों से आपके समक्ष कुछ तो रख ही दूंगी और जानती हूँ कुछ न कुछ तो आप भी अपने आप निकाल ही लेंगे क्योंकि सच है कि आज की जनता सब जानती है ,बेवकूफ नहीं है ,किसी से पागल बनने वाली भी नहीं है .
               राजनीती और गठरी उद्योग कैराना की नसों में पल रहा है .यहाँ एक तरफ नेता हैं तो दूसरी तरफ गठरी के माध्यम से तस्करी करने वाले .एक तरफ लोगों के पेट नेतागर्दी से भरता है तो दूसरी तरफ अवैध सामानों को गठरी में बांधकर बॉर्डर पार ले जाकर पैसा कमाने से ,जबकि एक स्थानी…

शामली में गैस रिसाव से ३०० बच्चे बीमार और चेतन भगत

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दिल्ली -एनसीआर में ३१ अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई ही थी कि लेखक चेतन भगत उसकी भर्तसना भी करने लग गए यह कहते हुए कि ,''यह हमारी परंपरा का हिस्सा है बिना पटाखों के बच्चों की कैसी दिवाली ?  उनकी इस ट्वीट की देखा देखी  ठाकरे भी बोले तो क्या व्हाट्सप्प पर  छोड़ेंगे पटाखे  इस तरह  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर बवाल मचा ही था कि दिन की एक घटना ने सभी के मुंह पर ताले लगा दिए खबर यह थी -
''नई दिल्ली: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक चीनी मिल से गैस रिसाव की वजह से 300 से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए हैं. दो स्कूलों के बच्चे इस गैस रिसाव का शिकार हुए हैं. ANI के अनुसार गैस रिसाव में 30 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है. बीमार बच्चों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. चीनी मिल से कौन सी गैस का रिसाव  हुआ है, इसके बारे में अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता है.''
 अब पटाखों की तरफदारी करने वाले ज़रा एक बार गौर फरमा लें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के सामयिक व् दूरंदेशी  फायदे को तो शायद अपने मुंह पर स्वयं ही ताले लगा लेंगे .
     अभी प…

...जननी गयी हैं मुझसे रूठ .

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वो चेहरा जो
        शक्ति था मेरी ,
वो आवाज़ जो
      थी भरती ऊर्जा मुझमें ,
वो ऊँगली जो
     बढ़ी थी थाम आगे मैं ,

वो कदम जो
    साथ रहते थे हरदम,
वो आँखें जो
   दिखाती रोशनी मुझको ,
वो चेहरा
   ख़ुशी में मेरी हँसता था ,
वो चेहरा
   दुखों में मेरे रोता था ,
वो आवाज़
   सही बातें  ही बतलाती ,
वो आवाज़
   गलत करने पर धमकाती ,

वो ऊँगली
   बढाती कर्तव्य-पथ पर ,
वो ऊँगली
  भटकने से थी बचाती ,
वो कदम
   निष्कंटक राह बनाते ,
वो कदम
   साथ मेरे बढ़ते जाते ,
वो आँखें
   सदा थी नेह बरसाती ,
वो आँखें
   सदा हित ही मेरा चाहती ,
मेरे जीवन के हर पहलू
   संवारें जिसने बढ़ चढ़कर ,
चुनौती झेलने का गुर
     सिखाया उससे खुद लड़कर ,
संभलना जीवन में हरदम
     उन्होंने मुझको सिखलाया ,
सभी के काम तुम आना
    मदद कर खुद था दिखलाया ,

वो मेरे सुख थे जो सारे
   सभी से नाता गया है छूट ,
वो मेरी बगिया की माली
   जननी गयी हैं मुझसे रूठ ,
गुणों की खान माँ को मैं
    भला कैसे दूं श्रद्धांजली ,
ह्रदय की वेदना में बंध
    कलम आगे न अब चली .
           शालिनी कौशिक
                [कौशल ]

गौतम से पहले मुनेश को सलाम

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''दरों दीवार पे हसरत से नज़र रखते हैं , खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं .''     कह एलम का नौजवान गौतम पंवार भी अपने  देश पर शहीद हो गया और नाम रोशन कर गया न केवल अपने छोटे से कसबे एलम का बल्कि पूरे प्रदेश का जहाँ से कोई भी अब ये नहीं कह सकता कि यहाँ की मिटटी में केवल नेता ही जन्म लेते हैं .गौतम की निपुणता के मुरीद थे अफसर .एक युवा ,बहादुर नौजवान का इस तरह चले जाना बहुत दुखद है और सबसे ज्यादा उस माँ के लिए जो अपना जीवन अपने बच्चों के लिए ही कुर्बान कर देती है .       जानती हूँ मेरी पोस्ट का  शीर्षक सबको अजीब लगेगा और कुछ को तो गुस्सा भी आ जायेगा किन्तु मैं यहाँ गौतम से भी ज्यादा बड़ी शहादत देख रही हूँ मुनेश की जो सौभाग्य से गौतम के ही कहूँगी ,माँ है ,समाचारपत्र से ही पता लगा कि मुनेश देवी के पति तो नौकरी के कारण घर से बाहर ही रहते थे और मुनेश देवी ने ही अपने तीनों बच्चों में वो प्रेरणा उत्पन्न की कि वे देश सेवा के योग्य बन सके .       माँ का रिश्ता होता ही ऐसा है जो अपने बारे में कुछ नहीं सोचता ,उसके मन में चौबीस घंटे अपने बच्चे की चिंताएं हावी रहती हैं ,ऐसे में अपने…

अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन,राजस्थान -हिंदी साहित्य को बंधनमुक्त करे .

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देश में १ अक्टूबर से १२ अक्टूबर तक राजस्थान में १५ वां अन्तर्राष्ट्रीय  हिंदी सम्मलेन चल रहा है .लेखन कार्य में लगी हूँ तो ऐसे सम्मलेन का कौन लेखक होगा जो हिस्सा नहीं बनना चाहेगा किन्तु उसके लिए जो लेखन चाहिए उतनी उत्कृष्टता लिए मेरा लेखन तो नहीं है क्योंकि नहीं लिख सकती उन नियम कायदों को मानते हुए जो हिंदी साहित्य के लेखन के लिए आवश्यक हैं              कहा जाता है और दृष्टिगोचर भी होता है ''कि साहित्य समाज का दर्पण है ''.हम स्वयं देखते हैं कि जैसे-जैसे समाज परिवर्तित होता है वैसे-वैसे साहित्य में भी परिवर्तन दिखाई देने लगता है .समाज में जैसे-जैसे उच्छ्रंखलता बढ़ती जा रही है वैसे ही साहित्य भी सीमायें लांघने लगा है .         अब यदि मैं मुख्य मुद्दे पर आती हूँ तो वह मुख्य मुद्दा है ''बंधन''जिसमे हमारा समाज बंधा है और साहित्य भी ,समाज में रहना है तो बंधन मानने होंगे उसी तरह यदि साहित्य रचना है तो भी बंधनों में बँधकर ही साहित्य का सृजन करना होगा ,साहित्य  जन-समुदाय को अपने से बांधता है किन्तु उसके लिए साहित्यकार को कितने बंधनों से गुजरना पड़ता है उसका…

इज़्ज़तघर मतलब नया बलात्कार घर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को एक देशभक्त महिला अधिवक्ता का खुला पत्र

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बहुत सह लिया ,सुन लिया ,सारी परिस्थितियां अपने क्षेत्र के पक्ष में होते हुए मात्र राजनीतिक स्थिति खिलाफ होते हुए कम से कम मेरा मन सब कुछ गंवाने को गंवारा न हुआ क्योंकि न केवल इसमें मात्र मेरे क्षेत्र के आर्थिक हितों की हानि है बल्कि इसमें जनता के न्यायिक हित भी छिन रहे हैं और जनता के द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का पैसा भी ,इसलिए देश हित को राष्ट्रकवि मैथली शरण गुप्त जी के निम्न शब्दों को याद करते हुए -
''जो भरा नहीं है भावों से ,बहती जिसमे रसधार नहीं ,
वह ह्रदय नहीं है ,पत्थर है ,जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं .''
इसलिए आखिर न चाहते हुए देश सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले ,हर समय देशहित को लेकर चिंतित मोदी जी के समक्ष अपनी यह समस्या रखने को मैंने सोशल मीडिया का चयन किया क्योंकि मोदी जी ने भी जनता से जुड़ने को सोशल मीडिया को अपनाया है और इसके माध्यम से काम कर इसे नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है .
अब मैं आती हूँ अपनी काम की बात पर जिसके लिए मैं चाहती हूँ कि मोदी जी थोड़ा सा ध्यान इधर देकर इस समस्या का न्यायपूर्ण निपटारा करें -
२८ सितम…

संस्कृति रक्षक केवल नारी

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यूनान ,मिस्र ,रोमां सब मिट गए जहाँ से ,
बाकी अभी है लेकिन ,नामों निशां हमारा .
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ,
सदियों रहा है दुश्मन ,दौरे ज़मां हमारा .
भारतीय संस्कृति की अक्षुणता को लक्ष्य कर कवि इक़बाल ने ये ऐसी अभिव्यक्ति दी जो हमारे जागृत व् अवचेतन मन में चाहे -अनचाहे विद्यमान  रहती है  और साथ ही इसके अस्तित्व में रहता है वह गौरवशाली व्यक्तित्व जिसे प्रभु ने गढ़ा ही इसके रक्षण के लिए है और वह व्यक्तित्व विद्यमान है हम सभी के सामने नारी रूप में .दया, करूणा, ममता ,प्रेम की पवित्र मूर्ति ,समय पड़ने पर प्रचंड चंडी ,मनुष्य के जीवन की जन्मदात्री ,माता के समान हमारी रक्षा करने वाली ,मित्र और गुरु के समान हमें शुभ कार्यों  के लिए प्रेरित करने वाली ,भारतीय संस्कृति की विद्यमान मूर्ति श्रद्धामयी  नारी के विषय में ''प्रसाद''जी लिखते हैं -
''नारी तुम केवल श्रद्धा हो ,विश्वास रजत नग-पग तल में ,
पियूष स्रोत सी बहा करो ,जीवन के सुन्दर समतल में .''
संस्कृति और नारी एक दूसरे के पूरक कहे जा सकते हैं .नारी के गुण ही हमें संस्कृति के लक्षणों के रूप में दृष्टिगोचर होते …

कोई और कहे न कहे - मैं तो कहूँगी - ''कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .''

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