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December, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सोनिया-मुलायम :राजनीति के आदर्श

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''जो भरा नहीं है भावों से ,
      बहती जिसमे रसधार नहीं .
वह ह्रदय नहीं है पत्थर है ,
     जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं .''
   बचपन से राष्ट्रप्रेम की ये पंक्तियाँ पढ़ते हुए ह्रदय में राष्ट्र भावना सर्वोपरि रही किन्तु आज के दो समाचार इस भावना में थोड़ा सा हेर-फेर कर गए और वह हेर-फेर स्वदेश के स्थान पर इन पंक्तियों को कुछ यूँ ह्रदय में टंकित कर गया -
  '' वह ह्रदय नहीं है पत्थर है ,
        जिसमे बच्चे का प्यार नहीं .''
और किसी अन्य हेर-फेर के स्थान पर सभी ये समझ सकते हैं कि ये किसी गैर के बच्चे के लिए नहीं बल्कि अपने खुद के बच्चों के लिए प्यार की बात हो रही है .
       आज के दो समाचार एक तो सीधी तरह से माँ का बेटे के प्रति अनुराग दर्शित कर रहा है तो दूसरा समाचार घुमा-फिराकर बाप का बेटे के हिट को सर्वोपरि महत्व देता हुआ दिखा रहा है .
     अध्यक्ष बनाये  बगैर सोनिया ने खुद ही पार्टी से दूरी बना कर राहुल के हाथों में पार्टी की कमान सौंप दी और यह तब जबकि राहुल अब तक के राजनीतिक कैरियर में पार्टी के लिए अपनी कोई उपयोगिता साबित नहीं कर पाए हैं और काफी हद तक पार्…

अब और न मरेंगे मोदी जी

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"कुछ लोगों को मनसब गूंगा बहरा कर देते हैं,
रोटी मंहगी करने वाले जहर को सस्ता कर देते हैं."
        गुलजार देहलवी की ये पंक्तियाँ हमें रूबरू करा रही हैं उन परिस्थितियों से जो हमारे मीडिया द्वारा बनाये गये, अच्छे दिनों की सोच लाये गये नई - नई जैकिट, कुर्ते व सूट से सजाये  हुए, तराशे हुए दिखावा पसंद जनता द्वारा सम्पूर्ण देशवासियों पर थोपे गये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की तानाशाही पसंद नीति व स्वयं को देश का सबसे काबिल प्रधानमंत्री साबित करने की जिद से उपजी हुई है और जिसका परिणाम यह है कि जनता नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने पर भी लाइनों में खड़े होकर मर रही है या कैश न मिलने पर घरों में जहर खाकर मर रही है.
         काले धन - काले मन से देश बर्बाद कहने वाले मोदी शायद स्वयं को सफेद धन - सफेद मन वाला मानते हैं यह एक अच्छी बात भी है और रिकार्ड तथ्य भी कि 'चोर ने कभी भी खुद को चोर नहीं कहा'. आज राजनीति में मोदी जी ने जिस तालाब की खुदाई कराई है वह केवल और केवल कीचड़ से भरा हुआ था, ये औरों पर कीचड़ उछाल रहे हैं और सब इन पर किन्तु न इनका कोई नुकसान न उनका, बल्कि कीचड़ उछालने वालों…

मान गए भाई -भाजपाई ही देशभक्त:भाजपाई ही रामभक्त

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भाजपा देगी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच ?

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शाईस्तगी को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं ,

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तानेज़नी पुरजोर है सियासत  की  गलियों में यहाँ , ताना -रीरी कर रहे हैं  सियासतदां  बैठे यहाँ . .................................................... इख़्तियार मिला इन्हें राज़ करें मुल्क पर , ये सदन में बैठकर कर रहे सियाहत ही यहाँ . ..................................... तल्खियाँ इनके दिलों की तलफ्फुज में शामिल हो रही , तायफा बन गयी है देखो नेतागर्दी अब यहाँ . .............................................. बना रसूम ये शबाहत रब की करने चल दिए , इज़्तिराब फैला रहे ये बदजुबानी से यहाँ . ..................................................... शाईस्तगी  को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं , रफ्ता-रफ्ता नीलाम  हशमत मुल्क की करते यहाँ . ............................................................. जिम्मेवारी ताक पर रख फिरकेबंदी में खेलते , इनकी फितरती ख़लिश से ज़ाया फ़राखी यहाँ . ....................................................... देखकर ये रहनुमाई ताज्जुब करे ''शालिनी'' शास्त्री-गाँधी जी जैसे नेता थे कभी यहाँ . ...................................................... शब्दार्थ :-तानेजनी -व्यंग्य ,ताना री…

मुस्लिम महिला की स्थिति मजाक

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन तलाक के मुद्दे पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा -''मुस्लिम महिलाओं से क्रूरता है तीन तलाक ''.आरम्भ से हम सुनते आये कि मुसलमानों में बस पति ने कहा ''तलाक-तलाक-तलाक'' और हो गया तलाक ,आज ये मुद्दा चर्चाओं में आया है जब कहर के तूफ़ान मुस्लिम महिलाओं पर बहुत बड़ी संख्या में ढा चुका ,पर यही सोचकर संतोष कर लेते हैं कि ''चलो कुफ्र टूटा ख़ुदा ख़ुदा करके ''.
      ''तीन तलाक '' मुस्लिम महिलाओं के लिए जीवन में एक नश्तर के समान है ,नाग के काटने के समान है जिसका काटा कभी पानी नहीं मांगता ,साइनाइड जहर के समान है जिसका क्या स्वाद है उसे खाने वाला व्यक्ति कागज पेन्सिल लेकर लिखने की इच्छा लेकर उसे चाहकर  भी नहीं लिख पाता,ऐसा विनाशकारी प्रभाव रखने वाला शब्द ''तीन तलाक'' मुस्लिम महिलाओं के जीवन की त्रासदी है .अच्छी खासी चलती शादी-शुदा ज़िन्दगी एक क्षण में तहस-नहस हो जाती है .पति का तलाक-तलाक-तलाक शब्द का उच्चारण पत्नी के सुखी खुशहाल जीवन का अंत कर जाता है और कहीं कोई हाथ मदद को नहीं आ पाता क्योंकि मुस्लिम शरी…