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''जितनी देखी दुनिया सबकी दुल्हन देखी ताले में''

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कविवर गोपाल दास ''नीरज''ने कहा है -
''ज

आखिर प्रधानमंत्री ने स्वीकारी नेहरू-गांधी परिवार की श्रेष्ठता

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आज एकाएक एक शेर याद आ गया .कुछ यूँ थी उस शेर की पंक्तियाँ -
''कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों ,
सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते .
तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो लेकिन
फूल की खुशबू को समेट नहीं सकते .''
सियासत आदमी से जो न कहलवादे मतलब सब कुछ कहलवा सकती है सही शब्दों में कहूँ तो उगलवा सकती है और ऐसा ही हो गया जब प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू में जाने माने कॉंग्रेसी दिग्गज गिरधारी लाल डोगरा के जन्म शताब्दी समारोह में गिरधारी जी के २६ बार बजट पेश करने पर अपने विचार प्रस्तुत करते वक्त अपने मुख कमल से जो उद्गार व्यक्त किये वे उनके न चाहते हुए भी उस सच्चाई को सबके सामने ला रहे थे जिससे भाजपाई और स्वयं प्रधानमंत्री भी आज तक बचते आ रहे थे , वे विचार कुछ यूँ थे -
''यह तभी संभव होता है जब आपकी व्यापक स्वीकार्यता हो .''
और ये वे शब्द हैं जिससे आने वाले वक्त में कॉंग्रेसियों को स्वयं के हाईकमान को लेकर एक बार फिर गर्व करने का अवसर मिल गया क्योंकि सभी जानते हैं कि नेहरू गांधी परिवार ही देश पर शासन सत्ता को सबसे लम्बे समय तक सँभालने वाला परिवार है और आज उस पर उनके धु…

भुलाकर मज़हबी मुलम्मे ,मुहब्बत से गले मिल लें ,-तभी हो ईद मुबारक

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मुबारकबाद सबको दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , महक इस मौके में भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ********************************************* मुब्तला आज हर बंदा ,महफ़िल -ए -रंग ज़माने में , मिलनसारी यहाँ भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , ************************************************************* मुक़द्दस दूज का महताब ,मुकम्मल हो गए रमजान , शमा हर रोशन अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे , **********************************************************
रहे मज़लूम न कोई ,न हो मज़रूह हमारे से , मरज़ हर दूर अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे . *************************************************************
ईद खुशियाँ मनाने को ,ख़ुदा का सबको है तौहफा , मिठास मुरौव्वत की भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे . ******************************************************************** भुलाकर मज़हबी मुलम्मे ,मुहब्बत से गले मिल लें , मुस्तहक यारों का कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .

केवल अशिक्षितों को दोष क्यों इसके जिम्मेदार पढ़े-लिखे रूढ़िवादी भी -विश्व जनसँख्या दिवस

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भाजपा के एक और गलत-ज्ञानी

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Governor of Rajasthan and chancellor Kalyan Singh on Tuesday once again created a controversy by suggesting that the word ‘adhinayak’ in the national anthem should be removed as it praises the British rulers of pre-Independence era.
गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर भारत के बँगला साहित्य के शिरोमणि कवि थे.
उनकी कविता में प्रकृति के सौंदर्य और कोमलतम मानवीय भावनाओं का उत्कृष्ट चित्रण है.
"जन गण मन" उनकी रचित एक विशिष्ट कविता है जिसके प्रथम छंद को हमारे राष्ट्रीय गीत होने का गौरव प्राप्त है.
गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर, काव्यालय की ओर से, आप सबको यह कविता अपने मूल बंगला रूप में प्रस्तुत है.  बंगला मूल जन गण मन शब्दार्थ

जन गण मन अधिनायक जय हे 
भारत भाग्य विधाता 
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंग 
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा 
उच्छल जलधि तरंग 
तव शुभ नामे जागे 
तव शुभ आशिष मागे 
गाहे तव जय गाथा 
जन गण मंगल दायक जय हे 
भारत भाग्य विधाता 
जय हे जय हे जय हे 
जय जय जय जय हे

हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द को चोट पहुंची है .

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