सोमवार, 28 अप्रैल 2014

ये कहाँ ले आये नरेंद्र मोदी


झूठ की खेती करते हैं मां-बेटे : मोदी
सोनिया की टिप्पणी पर कहा- ‘पापियों’ को अब भगवान भी नहीं बचा सकते
कहीं मुझे चांटे न लगा दें मां-बेटे
फतेहपुर। नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर व्यंग्य करते हुए कहा, ′मां-बेेटे के मन में मेरे लिए काफी गुस्सा भरा है। अगर मैं सामने आ जाऊं तो दोनों मेरा न जाने क्या हश्र करेंगे। शायद मुझे दस-बारह चांटे ही लगा दें।′[अमरउजाला से साभार ]


''कपिल से बड़े कॉमेडियन हैं राहुल ,झूठ की खेती करते हैं माँ-बेटे ,कहीं मुझे चाटें न लगा दें माँ-बेटे ''-राजनीति का यह स्तर कभी नहीं था और न ही भाजपा का ,इस सबकी शुरुआत तबसे हुई जबसे नरेंद्र मोदी नाम की शख्सियत ने गुजरात की राजनीति से केंद्र की राजनीति की तरफ कदम बढ़ाने आरम्भ किये .इस तरह की निकृष्ट भाषा शैली कभी भी राजनीति में प्रयोग नहीं हुई होगी जिस तरह की निकृष्ट भाषा शैली नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में तालियां पिटवाने के लिए लगातार इस्तेमाल किये जा रहे हैं और उसमे कॉमेडी खुद कर रहे हैं और कॉमेडियन राहुल को कह रहे हैं .
   सोनिया गांधी व् राहुल गांधी पर लगातार निशाना लगाते लगाते और उसमे अपने जैसी ही सोच वाले लोगों की तालियां सुनते सुनते आज मोदी अति आत्मविश्वास में हैं और इन तालियों को ही जनता का एकतरफा फैसला कह प्रफुल्लित हुए जा रहे हैं जो कि  किसी नौटंकी में भी ऐसी ही सीटियों व् हू-हा के साथ बजती हैं .वे कहते हैं कि ''सोनिया गांधी व् राहुल -[गौर कीजिये यहाँ मैडम व् शहज़ादा शब्द से परहेज किया नरेंद्र मोदी ने शायद याद आ गया है कि वे जिस राज्य से ताल्लुक रखते हैं वहां आज भी प्रजा होती है और ऐसे में राजा तो वे स्वयं ही हुए और जब वे राजा तो राहुल कैसे शहज़ादे हो सकते हैं और स्वयं को राजा समझकर वे इस ''लोकतंत्रात्मक गणराज्य ''के नागरिक होते हुए भी कुछ भी बोलने के हक़ रखते हैं ] इस बात से क्रोधित हैं कि एक चाय वाला उन्हें चुनाव में ललकार रहा है ,माँ-बेटे में मेरे खिलाफ झूठ बोलने की होड़ लगी है उन्हें बड़ी चिंता है कि पिछले ६० सालों  में इस परिवार को किसी ने नहीं ललकारा और एक चाय वाला सामने खड़ा है .''किस गुमान या ग़लतफ़हमी का शिकार हैं ये नरेंद्र मोदी ,समझ में नहीं आता .गांधी परिवार जिन झंझावातों को झेलकर आज राजनीति में ,भले ही कोई सरकार आये या जाये ,सर्वोच्च पद पर विराजमान है और देश के प्रथम परिवार का हर देशभक्त के मन में स्थान लिए है वे झंझावात तक झेलने इन मोदी के वश में नहीं है .ये तो झंझावात पैदा करने वालों में हैं न कि उन्हें रोकने वालों में .२००२ के गुजरात दंगें इन्हीं के झंझावात थे जहाँ तक इन्हें कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ा और जनता के आरोपों का सामना करना पड़ा ,अगर ये मान भी लिया जाये कि इनका हाथ उनमे नहीं था तो भी एक मुख्यमंत्री होने के नाते इनका जो कर्तव्य बनता था मोदी ने उनमे से एक भी पूरा नहीं किया, जनता को अपने हमदर्द के रूप में इनका कोई सहारा नहीं मिला ,दंगों में मारे गए कॉंग्रेस के एहसान जाफरी के परिजनों से ये आज तक भी जाकर नहीं मिले और जिस गांधी परिवार पर ये १९८४ के सिख दंगों का दाग लगाते फिर रहे हैं उन्होंने ऐसे दुखद घडी में भी जनता के साथ अपना प्यार और स्नेह बनाये रखा  क्योंकि जिन प्रिय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अकाल मृत्यु का समाचार मिलते ही दिल्ली सहित देश के अनेक भागों में हिंसा भड़क उठी ,चारों ओर नफरत ही नफरत थी -बदले की प्रबल भावना ,लगता था कि ये किसी से रुकेगी नहीं ,तब ही घोषणा हुई कि श्रीमती गांधी के सुपुत्र चिरंजीवी राजीव को भारत का प्रधानमंत्री बनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है .प्रधानमंत्री होते ही राजीव जी ने राष्ट्र के नाम पहला प्रसारण किया -बड़े नपे तुले शब्दों में उन्होंने कहा -''वह केवल मेरी ही माँ नहीं ,हम सबकी माँ थी ,हिंसा घृणा व् द्वेष से इंदिरा गांधी की आत्मा को दुःख पहुँचता था -आप शांत रहें और धैर्य से काम लें ,बिलखते हुए रोते  हुए नागरिकों के आंसू थम से गए जादू सा हो गया पूरे राष्ट्र पर -एक ओर इंदिरा जी का पार्थिव शरीर पड़ा हुआ था और दूसरी ओर माँ का लाडला -आंसुओं को थामे हुए ,भारत माँ की सेवा में जुटा था .सारी रात स्वयं दिल में भारी तूफ़ान रोके हुए दिल्ली की बस्तियों में घूम-घूमकर राजीव जी ने दुखी जनता के आंसू पोंछे राजीव जी ने ये सब तब किया जबकि दो सिखों ने ही उनकी माँ के सुरक्षा गार्ड होते हुए इस निंदनीय कृत्य को अंजाम दिया था किन्तु उनके मन में उस समुदाय के प्रति कोई वैर भाव नहीं था कहीं उनके मुंह से ऐसा नहीं निकला कि मेरी माँ को मारने वाले मुझे प्रधानमंत्री बनते देख झूठ की खेती करेंगें या मेरे चाटें मार देंगे  ,वे तो अपने दुःख को भूलकर  जनता को ही अपना परिवार समझकर उसके साथ आ खड़े हुए और आजतक उनका परिवार उसी पथ का अनुसरण कर रहा है सोनिया जी व् प्रियंका ने भी उसी पथ का अनुसरण करते हुए राजीव गांधी के कातिलों को क्षमा प्रदान की है और इनके इसी निश्छल प्रेम के कारण सारा देश एक तरफ और जनता के लिए ये परिवार एक तरफ ही रहता है और यही इनके विरोधियों को फूटी आँख नहीं सुहाता है और वे इनको अपमानित कर ही मदारी का तमाशा करते फिरते हैं .
   ऐसे परिवार को अपमानित कर ये देश की राजनीति में असभ्यता के झंडे गाड़ने में लगे हैं जो अपने प्रिय के मारे जाने पर भी दुश्मनों को माफ़ करने की क्षमता रखते हैं ,जो राहुल गांधी प्रियंका के बच्चों के गाड़ी की साइड लगने पर अपने अधीनस्थ से सभ्यता से आगे से ध्यान रखने को कहते हैं जब कि एक आम आदमी भी ऐसे में मार पिटाई पर उतारू हो जाता है उन्हें ये अपने स्तर पर लाने की कोशिशें कर रहे हैं .इनके अवतरण के बाद से गुजरात के जो हाल हैं वे आज के अमर उजाला में डॉ,जे.एस.बन्दूकवाला के हिमांशु मिश्र द्वारा लिए गए साक्षात्कार में पढ़े जा सकते हैं 

मोदी अमीर बहुसंख्यकों के रॉबिनहुड हैं ः बंदूकवाला
मोदी के पीएम बनने की चर्चा शुरू होते ही मेरे तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसा शख्स जो मुसलमान तो छोड़िये, गरीब हिंदुओं का भी नहीं है। आपने रॉबिनहुड के बारे में सुना है? जिस रॉबिनहुड को हम जानते हैं वह अमीरों से लूट कर गरीबों में बांट देता था। मगर मोदी, ये तो उल्टे गरीबों से छीन कर अमीरों में बांटते हैं।
क्या मोदी वाकई खतरा हैं?
मोदी नहीं उनकी विचारधारा! जो कि उन्हें आरएसएस और उसके अनुषांगिक संगठनों से विरासत में मिली है। गुजरात धीरे-धीरे हिटलर के दौर का जर्मनी बनता जा रहा है।.........
और फिर मोदी का ये कहना कि ये क्रोधित हैं कि इन्हें ६० सालों से किसी ने नहीं ललकारा ,५६ इंच के सीने वाले इस शख्स को अपने सहयोगियों को ऐसे तो नहीं भूलना चाहिए जबकि वे सारे जहाँ से उनकी पत्नी तक को छिपाकर उनकी मदद कर रहे हों .मोदी को ये याद रहना चाहिए कि इन्हीं की तरह के असभ्य कटाक्ष बाबा रामदेव भी इन पर पूर्व में कर चुके हैं और निरंतर करते ही रहते हैं क्योंकि उन्हें योग भी इतनी प्रसिद्धि का जरिया नहीं दिखा जितनी प्रसिद्धि का जरिया इस परिवार पर बेवजह की कीचड उछालने से मिलती दिखाई दी है और इस परिवार ने उन्हें भी झेला  है और २००४ में इन्हीं की पार्टी को भी जिसे सोनिया जी के विदेशी मूल का मुद्दा अपनी सरकार बनाने का सबसे आसान तरीका नज़र आया था और जिस मुद्दे को जनता ने कूड़ेदान में फेंककर सोनिया जी के पक्ष में फैसला दिया था जिसे सोनिया जी को कभी अपनाना ही नहीं था नहीं तो इनके अनुसार सत्ता की चिंता में क्रोधित सोनिया जी को तब कोई सा भी कानून इस पद को सुशोभित करने से नहीं रोक सकता था और रही राहुल गांधी जी की बात तो वे २००४ से सांसद हैं और सरकार में ही हैं अगर वे चाहते तो कभी भी प्रधानमंत्री पद पर बैठ सकते थे किन्तु उन्होंने पहले देश की समस्याओं के बारे में समझना और देश की जनता के कर्मठ सेवक बनने के रास्ता अपना लिया न कि मोदी की तरह अपने दल के ही प्रधानमंत्री बनने को बैठे कई योग्य नेताओं को दरकिनार कर स्वयं आगे बढ़ आने का रास्ता अपनाया और प्रियंका गांधी ने आकर इनकी ही बातों का मुहंतोड़ जवाब देना क्या शुरू किया तो ये उनके पति राबर्ट वाड्रा को घेर देश को भ्रमित  करने में जुट गए जबकि जो केजरीवाल इस मुद्दे को लेकर आये थे वे ही अब इस मुद्दे को कोई खास तरजीह नहीं दे रहे हैं और यही कह रहे हैं कि भाजपा रोबर्ट वाड्रा के जरिये जनता को भ्रमित करने की कोशिशें कर रही है .
   इन मोदी को पास देश की किसी समस्या का कोई समाधान नहीं है ,देश के विकास के लिए कोई विज़न नहीं .ये गांधी परिवार को ही लक्ष्य मानकर चल रहे हैं और उन्हें किसी भी तरह जनता की नज़र में गिराकर आगे बढ़ने की कोशिशों में लगे  हैं जो कि असंभव है क्योंकि जनता को इससे कोई सरोकार नहीं ''कि रॉबर्ट वाड्रा मॉडल क्या है ,राहुल गांधी बुद्धू-पप्पू हैं ,माँ-बेटे झूठ की खेती करते हैं ,'' जनता को केवल ये चाहिए कि उसकी समस्याओं के समाधान हों उसके पास जीवन में सब आवश्यक सुविधाएँ हों और वह सब हो जो ये मोदी अपने विज्ञापनों में तो दिखाते हैं लेकिन अपने भाषणों  में नहीं कहते .
   आज फैसला हमारे हाथ में है अगर दुर्भाग्य से ये भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो जनता मोदी से पूर्व के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के शासनकाल से भी ज्यादा रोयेगी क्योंकि तब ये होगा -
 ''कि एक वे थे जो कुछ नहीं कहते थे ,
   और एक ये हैं जो चुप नहीं रहते हैं .''
   दोनों ही स्थितियां दुखद हैं और ये विचारना अब देश की जनता को ही है कि देश किन हाथों में सौंपा जाये जिनमे देश और देशवासी दोनों सुरक्षित रह सकें और हमारी मितभाषी मृदुभाषी वसुधैव कुटुंबकम की संकल्पना भी .

शालिनी कौशिक 
   [कौशल ]

रविवार, 27 अप्रैल 2014

मीडिया कॉर्पोरेट घरानों को बिका

 अब आई कांग्रेस को मिडिल क्लास की याद 
लोकसभा चुनाव २०१४ का निर्णय अभी आना शेष है किन्तु  जिस तरह से मीडिया द्वारा कांग्रेस विरोधी और मोदी के पक्ष में प्रचार किया जा रहा है उससे ये तो साफ़ हो ही गया है कि इस बार के चुनाव केवल और केवल मीडिया ही लड़ रहा है कभी भी कहीं भी राहुल गांधी जी की रैलियों की सफलता का कोई ब्यौरा समाचारपत्रों की सुर्खियां नहीं बनता और मोदी जी के हर स्थान के भाषण को पूरे विवरण देकर प्रकाशित किया जाता है .दूरदर्शन पर साफ तौर पर दिखाया जाता है कि राहुल गांधी के लखनऊ दौरे में लोगों का हुजूम उनके साथ था किन्तु समाचार पत्र कहते हैं कि राहुल भीड़ न देख कर निराश हुए जबकि कहीं से लेकर कहीं तक भी राहुल गांधी के चेहरे पर निराशा के भाव नज़र नहीं आते .आज के समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी है एक खबर कि ''कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान में मिडिल क्लास गायब, नेता नाखुश  '' और इस समाचार से मीडिया क्या दिखाना चाहता है यह खुलकर सामने आ रहा है क्योंकि दूरदर्शन जो कि देश का सबसे ज्यादा प्रसार पाने वाला चैनल है उस पर आरम्भ से ही जिस वर्ग से जुड़े कॉंग्रेस के विज्ञापन आ रहे हैं वह मध्यवर्ग ही है .''दस सालों में हुई प्रगति ,हसीबा अमीन के विज्ञापन और अब मेरा वोट कांग्रेस को ''ये सभी विज्ञापन कांग्रेस को मध्यवर्ग से जोड़ते हैं फिर क्यूँ भ्रामक प्रचार द्वारा मीडिया कांग्रेस से जनता को तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है .मीडिया भले ही मोदी लहर को कितना प्रचारित कर ले किन्तु ये कहर जिन स्थानों पर है वे आज भी आम जनता के घरों से आस-पास से बहुत दूर हैं क्योंकि अभी जनता में इतनी संचार क्रांति नहीं है कि वह बैठकर इनकी वेबसाइट ही देखती रहे और सच्चाई को महसूस न कर सके और मीडिया के यह भ्रामक प्रचार ये तो साबित कर ही रहे हैं कि आखिर मीडिया के पास मोदी के पक्ष और कांग्रेस के विपक्ष के लिए इतना पैसा कहाँ से आ रहा है सभी जान गए हैं और स्वयं मीडिया इसका प्रचार कर रहा है तो जनता भी जानती है कि ये सब वही कॉर्पोरेट घरानों की कारगुज़ारी है जो मोदी को प्रधानमंत्री बनाकर अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं और मीडिया उनके हाथों बिक गया है .
  
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शनिवार, 26 अप्रैल 2014

आज का युवा !




जागरूक 
सचेत 
सतर्क  
आज का युवा !
जागरूक अधिकारों के लिए 
सचेत धोखाधड़ी से 
सतर्क दुश्मनों से 
आज का युवा !
साथ ही 
कृतघ्न 
उपेक्षावान 
लापरवाह 
भी 
आज का युवा !
कृतघ्न बड़ों की सेवा में 
उपेक्षावान देश हित करने में 
लापरवाह समाज के प्रति 
जीवन के धवल स्वरुप के संग 
ये स्याह लबादा ओढ़े है ,
खुद की कमियों से हो असफल 
ये बैठ ज़माना कोसे है .

शालिनी कौशिक 
 [कौशल ]

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

वोट आपको देना मतलब गले लगाना पाप को .


चले मियां जी हाथ में लेकर फूलों की कई माला ,
पीछे-पीछे सब घरवाले ,हर एक मोहल्ले वाला ,
देख के इतनी भीड़भाड़ को भाग के पूछें लाला
पहना है किस खुशी में तुमने अचकन शेखों वाला .
............................................................
लाला को आते जो देखा भीड़ ने शोर मचाया ,
ज़िंदाबाद के नारे कहकर हल्ला खूब मचाया ,
लाला जी लो हमको देख के समझ न तुमको आया
तुम्हरे दल का नेता भरने नाम यहाँ है आया .
..........................................................
पर आप चले क्यूँ शेख जी ऐसे ढोल तमाशे लेकर ,
ये नेता तो आप सभी से चले दूर ही हटकर ,
आप सभी का बुरा किया है इसने आगे बढ़कर
इसी नाम पर वोट हमारी जाती इसको छनकर.
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मूंछ उमेठे हँसे मियां तब लाला जी से बोले ,
मेरी बात को जरा गौर से सुनना कान को खोले ,
नहीं अगर हम शामिल होंगें इसका खून ही खौले
पीछे पड़ेगा घर आ -आकर हमरी नबज़ टटोले .
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वोे हमें है देना अपने कर्मठ उम्मीदवार को ,
इससे पीछा अभी छुड़ाके देखें अपने यार को ,
कहने चले ये माला लेके ,ये दे सकते आप को
वोट आपको देना मतलब गले लगाना पाप को .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

कॉंग्रेस में आज भी है माँ का स्थान अमित शाह जी

''दहलीज़ वही दुनियावी फितरत से बच सकी ,
तरबियत तहज़ीब की जिस दर पे मिल सकी .''
और आज भले ही अमित शाह ने राहुल गांधी का उपहास उड़ाने के लिए ही उनके प्रधानमंत्री बनने पर मां से पूछने की बात कही हो किन्तु अपने कटाक्ष में उन्होंने इस परिवार को तहज़ीब की तरबियत संजोने वाला तो साबित कर ही दिया क्योंकि आज आम तौर पर जो बच्चे अपने माता -पिता से पूछकर कोई काम करते हैं उनकी हंसी ऐसे बच्चे द्वारा उड़ाई ही जाती है जो गैर संस्कारी परिवार से सम्बद्ध रहे हों जैसे कि बॉबी फिल्म में नायक राजा अपने कॉलिज में फेयरवेल फंक्शन के लिए रुकना चाहता है किन्तु अपने मम्मी-पापा की इज़ाज़त के बाद जिस भावना की उसका एक सहपाठी यह कहकर हंसी उड़ाता है -
''लो ,एक प्रिसिपल साहब हैं जो ये कहते हैं कि अपनी ज़िंदगी के फैसले आप करो और एक ये माँ के लाल हैं जो हर बात के लिए उधर से परमिशन लेनी पड़ती है -अमां मौज उड़ाने के दिन हैं ,इसमें परमिशन क्या लेनी है .''
और ऐसे ही यहाँ अमित शाह राहुल गांधी की हंसी उड़ाने आ गए जिनकी खुद की ज़िंदगी में हमें तो लगता नहीं कि माँ की कोई भूमिका है क्योंकि विकिपीडिया जो कि इस तरह की सेलेब्रिटीस का कच्चा चिटठा रखता है उसमे भी केवल अमित शाह के पिता का ही नाम है माता के नाम का वहां उल्लेख नहीं है -
Spouse(s)
Sonal
Children
Jay (son)
Parents
Anilchandra Shah
Occupation
Politician
Cabinet
Government of Gujarat (2003–2010)
Portfolio
Ministry of Home Affairs
Religion
Hinduism
और आज ऐसी ही नस्लों की तादाद ज्यादा बढ़ रही है जिनके कारण बच्चों की ज़िंदगी में माँ-बाप एक बोझ बनकर ही रह गए हैं और ऐसी शिकायतें उन बच्चों की तरफ से ही ज्यादा हैं जो पढ़ लिखकर काबिल बन गए हैं क्योंकि अपना कैरियर बन जाने के बाद उनके लिए अपने माँ-बाप के लिए न तो कोई समय रहता है और न ही वे इसकी आवश्यकता समझते हैं क्योंकि तब उन्हें अपने से ज्यादा बुद्धिमान कोई और प्रतीत नहीं होता इसलिए तो ये भी कहा गया है -
''ज़िंदगी उस शख्स की सुकून से गुज़र सकी ,
औलाद जिसकी दुनिया में काबिल न बन सकी .''
किन्तु ऐसा वहीँ है जहाँ बच्चों में संस्कार नहीं हैं जहाँ बच्चों में संस्कार के बीज बोये गए हैं वहां बच्चे अपने माँ-बाप के साथ हमेशा एक सहारे के रूप में खड़े हैं और उनके साये तले ही अपनी ज़िंदगी को गुज़रना अपना सौभाग्य मानते हैं और अमित शाह ने अपनी व्यंग्यात्मक टिप्पणी से राहुल गांधी को इस देश की संस्कृति का संरक्षक ही साबित किया है क्योंकि हमारे देश की संस्कृति में तो माँ के चरणों में स्वर्ग कहा गया है कविवर गोपाल दास 'नीरज'' कहते हैं -
''जिसमे खुद भगवान ने खेले खेल विचित्र ,
माँ की गोदी से अधिक तीरथ कौन पवित्र .''
और यही नहीं हर वह अनोखी प्रेरणादायक सौगात जिससे हमें जीने की आगे बढ़ने की जीवन में सफल होने की प्रेरणा मिले उसे माँ का ही स्थान दिया गया है और ये तक कहा गया है कि भगवान सब जगह नहीं हो सकता इसलिए उसने माँ बनायीं .ओम शर्मा कहते हैं -
''काशी काबा छोड़ दें मत कर चारों धाम ,
थाम सके तो बावरे माँ का आँचल थाम .''
और इस महिमामयी व्यक्तित्व की शरण में अगर एक बेटा जाता है और अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन की चाह रखता है तो हर सच्चा भारतीय ऐसे व्यक्तित्व को नमन करने को ही आगे बढ़ेगा क्योंकि वैसे भी सोनिया जी न केवल राहुल गांधी की माँ हैं बल्कि राजनीति में उनसे ज्यादा समझ रखती हैं और यह भारतीय जनता पार्टी नहीं है जहाँ अपने बड़ों को या तो बाहर बैठा दिया जाता है या फिर उन्हें न पूछते हुए जीवित होते हुए भी मात्र जनता की वोटें खीचने को और उसे यह याद दिलाने को कि यह एक युगपुरुष की पार्टी है केवल फोटो को स्थान दिया जाता है हाँ ये अवश्य है कि सोनिया जी के व्यक्तित्व के सामने अपने को कमतर महसूस करने वाले ये राहुल गांधी को उस शक्ति को प्राप्त करने से रोकना चाहते हैं जिसे पाकर राहुल गांधी गर्व से यही कहते हैं -
''तू हर तरह से ज़ालिम मेरा सब्र आज़माले ,
तेरे हर सितम से मुझको नए हौसले मिले हैं .''
और ये हौसले ही तो हैं जो राहुल गांधी ,सोनिया गांधी के मुख़ालिफों को भारतीय संस्कृति के विपरीत आचरण को अपनाने को मजबूर करते हैं और उनके हौसलों को पस्त करते हैं .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

क्या आदमी सच में आदमी है ?

''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आदमी में इंसानियत ,...