शनिवार, 28 जुलाई 2012

रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पायेंगें.

Sky is the limit


लम्हे कभी फुर्सत के हमें मिल न पायेंगें,
रफ़्तार जिंदगी में सदा चलके पायेंगें.

बैठे अगर उदास कहीं टूट जायेंगें,
इस दिल में जोश भरके ही कुछ ढूंढ पायेंगें.

ये जिंदगी देती हमें कई राहें निरंतर ,
पाएंगे मंजिल इनपे गर हम बढ़ते जायेंगें.

न देखना मुड़कर कभी भूले से भी पीछे,
राहों के पत्थर रोकने को रोज़ आयेंगें .

बढ़ना है जिंदगी में अगर तुमको ''शालिनी''
ऐसे ख्याल दिल में तेरे खूब आयेंगे.

                           शालिनी कौशिक 
                                       [कौशल]

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

प्रणव देश के १४ वें राष्ट्रपति :कृपया सही आकलन करें





२६ जनवरी १९५० भारत में संविधान द्वारा गणतंत्र लागू किया गया और मई १९५२ में हुए प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव में डॉ.राजेंद्र प्रसाद विजयी हुए और देश के प्रथम राष्ट्रपति बने मई १९५७ में हुए दूसरे चुनाव में भी डॉ.राजेंद्र प्रसाद ही देश के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए भले ही वे इस पद पर रहने वाले एक  ही व्यक्ति थे किन्तु गणना की दृष्टि से देश के दूसरे राष्ट्रपति कहे जायेंगे और यदि देश के आंकड़ों में उनके सम्बन्ध में की गयी ये गणना सही  की जाये तो अन्य आंकड़े स्वयं सही होते जायेंगे-
१ मई १९५२           राजेंद्र प्रसाद 
२-मई १९५७           राजेंद्र प्रसाद 
३-मई १९६२          एस.राधाकृष्णन   
४ -मई १९६७          ज़ाकिर हुसेन 
५ -अगस्त १९६९      वी.वी.गिरी 
६ -अगस्त १९७४        फखुरुद्दीन अली अहमद 
७ -जुलाई १९७७           नीलम  संजीव रेड्डी 
८ -जुलाई १९८२           जैल  सिंह 
९ -जुलाई १९८७           आर.वैंकेट रमण 
१० -जुलाई १९९२         डॉ.शंकर दयाल शर्मा 
११ -जुलाई १९९७         डॉ.के.आर.नारायणन 
१२ -जुलाई २००२        डॉ.ए.पी .जे. अब्दुल कलाम 
१३ -जुलाई २००७         श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल 
      और यदि इसी क्रमानुसार हम आकलन करें तो माननीय श्री प्रणव मुखर्जी देश के १४ वें राष्ट्रपति की गणना में आते हैं 
और यही सही आकलन है क्योंकि यहाँ पद की बात  हो रही न की व्यक्ति की और पद की दृष्टि से प्रणव मुखर्जी देश के १४ वें राष्ट्रपति हैं भले ही व्यक्ति वे १३ वें हो.
                   शालिनी कौशिक 
                           [कौशल ]

सोमवार, 23 जुलाई 2012

हमें आप पर गर्व है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल

हमें आप पर गर्व  है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल 
                                               
          ''हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है ,
         बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दी-दावर पैदा .''
२३ जुलाई २०१२ सुबह ११.२० पर हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कैप्टेन लक्ष्मी सहगल स्वर्ग सिधार गयी और छोड़ गयी अपने मरीजों जिन्हें वे ९७ साल की उम्र में भी नित्य अपनी सेवाएं दे रही थी और हमें बहुत सी ऐसी बातें सोचने को जो एक ओर तो लक्ष्मी जी के देशप्रेम की यादें ताज़ा करती हैं तो दूसरी ओर हमें अपने नेताओं के मानसिक स्तर के पतन पर चुल्लू भर पानी में डूब मरने को विवश करती हैं.
सिंगापुर में आजाद हिंद फ़ौज की महिला शाखा का १९४२ में गठन हुआ .इसमें महिलाओं के विकास विभाग की अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मी सहगल बनायीं गयी.जब महिला सेना बनाने का प्रस्ताव सुभाष चन्द्र बोस ने रखा तो डॉ.लक्ष्मी ने उत्साह से इस कार्य को अंजाम दिया .जब महिला शाखा की अध्यक्स श्रीमती चिदंबरम ने कागज और कलम लेकर उन महिलाओं के नाम लिखे जो सेना में भर्ती होना चाहती थी तो डॉ.लक्ष्मी ने उस समय कहा -''आजादी के दस्तावेज पर स्याही से नहीं ,खून से हस्ताक्षर किया जाते हैं.''ऐसा कहकर उन्होंने चाकू से अपना अंगूठा चीरकर उस कागज पर अपने खून से हस्ताक्षर किये .उनका अनुसरण  अन्य महिलाओं ने भी किया .इस सेना का नाम ''रानी झाँसी रेजिमेंट ''रखा गया  .कमांडर डॉ.लक्ष्मी बनी .उन्हें कैप्टेन का रैंक मिला और बाद में वे कर्नल के पद पर पदोन्नत हुई बाद में डॉ.लक्ष्मी सहगल अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर ली गयी.
१९९८ में कैप्टेन लक्ष्मी सहगल को पद्मविभूषण से सम्मानित  किया गया और २००२ में वामदलों ने इन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया किन्तु देश के इतिहास के प्रति अनभिज्ञता एवं स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति क्रित्य्घ्नता  का उदाहरण हमें जो तब देखने को मिला उसने वास्तव में हमारा सर शर्म से झुका दिया .तब तेलगू देशम के अध्यक्ष और आन्ध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री चन्द्र बाबू नायडू को जब ये बताया गया कि वामदलों ने कैप्टेन लक्ष्मी सहगल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है तो उन्होंने आश्चर्य चकित होकर पूछा -''ये कौन हैं?''एक पत्रकार के शब्दों में ,''न मालूम कौन कौन से गलियारों को पारकर राजनीति तक पहुँचने वाले समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने अपने आपको एक हास्यास्पद ऊँचाई पर खड़े होकर गुरु गंभीर टिप्पणी की,''she is a good lady  but she stands no where near kalam .''{वह एक अच्छी महिला हैं किन्तु वह अब्दुल कलम के सामने कहीं नहीं ठहरती .}
एन.डी.ए. ने ए .पी.जे अब्दुल कलाम को अपना उम्मीदवार बनाया और अन्य सभी दलों के साथ कांग्रेस ने भी उनका समर्थन किया जबकि इतिहास साक्षी है कि जवाहरलाल नेहरु वकील का काला चोगा पहन कर राजनीति के क्षेत्र में विरोधी नेता श्री सुभाष चन्द्र बोस द्वारा स्थापित आजाद हिंद फ़ौज के सेनानियों -शाहनवाज खान ,ढिल्लन ,कैप्टेन लक्ष्मी सहगल का मुकदमा लड़ने एनी वकीलों के साथ दिल्ली के लाल किले पहुंचे  थे .ये उस वक़्त की राजनीति थी जब भले ही विचारधारा या लड़ने का तरीका अलग था किन्तु मकसद सभी का एक था -देश की आजादी .और अलग अलग ढंग अपना कर भी सभी सेनानी एक दुसरे के भाव जानते थे और उनका आदर करते थे.सुभाष चन्द्र बोस जो कि गाँधी विचार धरा के सर्वाधिक विरोधी थे , ने ही उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि से विभूषित किया था और एक आज के क्रित्घ्यं नेता जिन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक स्वर्णिम अवसर मिला भी और वह गवां भी दिया गया.यह अमर सिंह जी को कौन समझाए कि कलाम जी को काम करने के अवसर तभी मिले जब हमारा भारत स्वतंत्र हुआ और वे उस महिला को कलाम जी के समक्ष बौनी दिखाना चाह रहे थे जो वे स्वर्णिम अवसर प्रदान करने वालों में से एक थी.यही तो है कृत्याघ्नता कि जिन्होंने हमारे लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया हम उन्ही के योगदान को नकार स्वयं को ऊंचा दिखने में लगे हैं. 

सबसे ज्यादा अफ़सोस हमें डॉ.कलाम जैसी शख्सियत पर होता है जिन्होंने अपने सामने कैप्टेन लक्ष्मी सहगल की उम्मीदवारी देख कर भी अपना नाम वापस नहीं लिया जबकि उनका रवैय्या उस समय एक स्वतंत्रता सेनानी के सामने यदि नतमस्तक होने का होता तो उनके देश प्रेम की भावना में चार चाँद लग जाते.
   आज कैप्टेन लक्ष्मी सहगल हमें छोड़ गयी है और हम उनके प्रति अपने सही कर्तव्य का पालन नहीं कर पाए और उनकी देश सेवा को सही स्थान नही दे पाए ये शर्मिंगी हमेशा के लिए झेलने के लिए .
आज कैप्टेन लक्ष्मी सहगल हमें छोड़ गयी है और हम उनके प्रति अपने सही कर्तव्य का पालन नहीं कर पाए और उनकी देश सेवा को सही स्थान नही दे पाए ये शर्मिंगी हमेशा के लिए झेलने के लिए .
एक देशभक्त का स्थान स्वर्ग से भी ऊंचा है देशभक्ति के जज्बे से से भरपूर कैप्टेन लक्ष्मी सहगल को हम सभी का सलाम .हम उनके सम्बन्ध में केवल यही कह सकते हैं -
                 ''कुछ लोग वक़्त के सांचों में ढल जाते हैं,
                 कुछ लोग वक़्त के सांचों को ही बदल जाते हैं ,
                  माना कि वक़्त माफ़ नहीं करता किसी को 
                पर क्या कर लोगे उनका जो वक़्त से आगे निकल जाते हैं.''
                                                      शालिनी कौशिक 
                                                              [कौशल] 


शनिवार, 21 जुलाई 2012

प्रतिभा जी :एक आदर्श

प्रतिभा जी :एक आदर्श 


(From L - R) Prime Minister Manmohan Singh, Vice President Mohammad Hamid Ansari, Thailand's Prime Minister Yingluck Shinawatra and President Pratibha Patil stand behind a bullet-proof glass during India's national anthem at the Republic Day parade

२४ जुलाई २०१२ वह दिन है जब हमारे देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी अपने पद से सेवानिवृत्त होंगी .प्रतिभा जी का इस पद को सुशोभित  करना सम्पूर्ण विश्व  में महिलाओं  के  शीश  को उंचा  करता है कारण सभी जानते हैं जिस देश में महिलाओं  के ३३ %आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिज्ञ  जहर खाने या  गंगा में कूदने की बाते करते हों वहां संविधान के सर्वोच्च पद पर एक महिला का सुशोभित होना बहुत मायने रखता है और प्रतिभा जी ने इसी पुरुष सत्तात्मक समाज को अपनी काबिलियत द्वारा आइना  दिखाया  है  .प्रतिभा जी ने अपने कार्यकाल में बहुत से ऐसे   कार्यों को अंजाम  दिया है जिनके बारे में अधिसंख्य  जनता को ये  संदेह  था  कि एक महिला होने के कारण वे इन  कार्यों को नहीं कर पाएंगी  .जैसे कि सभी जानते हैं कि राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होता  है और सेनाओं में आज भी लड़कियों का वह स्थान नहीं है जो कि लड़कों का है जबकि  लड़कियों को जहाँ भी अवसर मिल रहे हैं वे अपनी श्रेष्ठता  साबित कर रही हैं .ऐसी स्थितियों में अधिकांश  की नज़रों में इस पद के लिए प्रतिभा जी कि योग्यता पर उँगलियाँ उठाई जा रही थी जो उन्होंने वापस उन्ही की और मोड़ दी  है जो उठा रहे थे और उन लोगों को अपने दिमाग पर जोर डालने  को विवश किया है जो लड़कियों की क्षमता को कम आंकते हैं .
२५ नवम्बर २००९ वह ऐतिहासिक  दिन जब उसके वायु सेना के अत्याधुनिक सुखोई  -30 एम्.के.आई.लड़ाकू विमान  में तीनो सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर  राष्ट्रपति प्रतिभा   देवी सिंह पाटिल जी ने उड़ान भरी .प्रतिभा जी ये कार्य करने वाली भारत की दूसरी  राष्ट्रपति हैं उनसे पहले राष्ट्रपति कलाम जी ने ही ये कार्य किया था.
    इसके एक माह  बाद  प्रतिभा जी ने नौसेना  के एकमात्र  विमान वाहक  पोत  विराट  पर सवार होकर  परेड का निरीक्षण  २३ दिसंबर २००९ को किया .
भारतीय थल सेना व् वायु सेना के संयुक्त युद्धाभ्यास ''सुदर्शन शक्ति '' में राजस्थान के बाड़मेर में राष्ट्रपति प्रतिभा जी सेना की वर्दी में एक टी-90 टैंक  पर सवार होकर युद्धाभ्यास के अवलोकन के लिए पहुंची.युद्धक टैंक की सवारी करने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति हैं. 
गाँधीवादी विचारधारा  से प्रेरित  भारतीय वेशभूषा से सुशोभित प्रतिभा जी ने इस पद की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ दी हैं और एक सामान्य भारतीय के दिमाग में लड़कियों के लिए नई सोच पैदा करने की परिस्थितियां पैदा की हैं प्रतिभा जी हम सभी के लिए सदैव आदर्श रहेंगी .प्रतिभा जी को समस्त देशवासियों की ओर से सस्नेह प्रणाम .
                                                              शालिनी  कौशिक 
                                                                {कौशल} 















शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

सृष्टि में एक नारी,


सृष्टि में एक नारी,


Free Artistic Wallpaper : Picasso - Girl Before MirrorFree Artistic Wallpaper : Picasso - Woman With a Flower



धरती पर जीवन रचने की भावना जब आई 
तब प्रभु ने औजार छोड़कर तूलिका उठाई.
सेवक ने तब प्रभु से पूछा ऐसे क्या रचोगे,
औजारों का काम आप इससे कैसे करोगे?
बोले प्रभु मुझको है बनानी सृष्टि में एक नारी,
कोमलता के भाव बना न सकती कोई आरी.
पत्थर पर जब मैं हथोडी से वार कई करूंगा,
ऐसे दिल में प्यार के सुन्दर भाव कैसे भरूँगा?
क्षमा करुणा भाव हैं ऐसे उसमे तभी ये आयेंगे,
जब रंगों के संग सिमट कर उसके मन बस जायेंगे.
इसीलिए अपने हाथों में तूलिका को थामा,
पहनाने दे अब मेरी योजना को अमली जामा. 
          


                                         शालिनी कौशिक 
                                                     [कौशल ]

मंगलवार, 17 जुलाई 2012

समझें हम.

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भारत पाकिस्तान की जनता के लिए ये एक खुशखबरी से कम नहीं है कि दिसंबर -जनवरी   में भारत पाकिस्तान  3 वन डे और २ टवेंटी  -20 मैच खेलेंगें  . २००७ के बाद भारत पाक की ये पहली क्रिकेट सीरीज कही जा सकती है .मुंबई हमले के बाद संबंधों पर ज़मी ये बर्फ अब पिघलने की ओर है और यही प्रार्थना है कि ये सम्बन्ध अब कभी दुश्मनी   के धुंध लके   में न रहें और पुराने  समय में जो हिन्दू-मुस्लिम प्रेम की कहानियां हमारे बड़ों के द्वारा हमे सुनाई जाती रही आज फिर वे हमारी  आँखों  के समक्ष  प्रत्यक्ष हो जाएँ . मेरी एक ग़ज़ल इसी सम्बन्ध में मेरे देशवासियों  की भाव नाओं को कुछ  यूँ उजागर करती है-
                     
''मुख्तलिफ  ख्यालात भले रखते हों मुल्क से बढ़कर न खुद  को समझें हम,
बेहतरी हो जिसमे अवाम की अपनी ऐसे क़दमों को बेहतर  समझें हम.

है ये चाहत तरक्की की राहें आप और हम मिलके पार करें ,
जो सुकूँ साथ मिलके चलने में इस हकीक़त को ज़रा समझें हम .

कभी हम एक साथ रहते थे ,रहते हैं आज जुदा थोड़े से ,
अपनी आपस की गलतफहमी को थोड़ी जज़्बाती  भूल  समझें हम .
                                   
देखकर आंगन में खड़ी दीवारें आयेंगें तोड़ने हमें दुश्मन ,
ऐसे दुश्मन की गहरी चालों को अपने हक में कभी न  समझें हम .

न कभी अपने हैं न अपने कभी हो सकते ,
पडोसी मुल्कों की फितरत को खुलके समझें हम .

कहे ये ''शालिनी'' मिल  बैठ मसले  सुलझा लें ,
अपने अपनों की मोहब्बत को अगर समझें हम .

         शालिनी कौशिक 
                  [ कौशल ]

शनिवार, 14 जुलाई 2012

अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ...

 अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ..

बलात्कार ,छेड़छाड़ ऐसे अपराध जो नारी जाति के विरुद्ध घटित होते हैं और  जिनकी पीड़ित हमेशा से नारी जाति ही  होती है .ऐसे अपराध जिनका दंड पीडिता ही भुगतती आई है और इस कारण या  तो ये अपराध पीडिता द्वारा छिपा लिया जाता  है और या इसे उजागर करने का परिणाम उसे निंदा या ये कहूं कि घोर निंदा के रूप में भुगतना पड़ता है जिसका परिणाम अंततः पीडिता को  आत्म हत्या के रूप में ही अपनाना पड़ता है.
  अभी ताज़ा घटनाक्रम में गुवाहाटी  असम में एक नाबालिग किशोरी  के साथ छेड़छाड़ की घटना चर्चा में है और हमेशा की तरह नारी चरित्र पर उंगली उठनी आरम्भ हो चुकी है 
जिसे  आप हमारी  प्रबुद्ध  ब्लोगर अंशुमाला  जी  के ब्लॉग  mengopeople पर प्रत्यक्षतः  पढ़  सकते हैं लिंक ये है -
 और शायद ऐसी ही मानसिकता ने कानून को कुछ कठोर उपाय अपनाने को विवश  किया  है .भारतीय साक्ष्य अधिनियम १८७२ की धारा १४६ में प्रतिपरीक्षा में विधि पूर्ण  प्रश्न के  विषय  में प्रावधान  किया है . धारा इस प्रकार है - 
  "जबकि किसी साक्षी से प्रतिपरीक्षा की जाती है तब उससे एतस्मिन पूर्व निर्दिषित प्रश्नों के अतिरिक्त ऐसे कोई भी प्रश्न पूछे जा सकेंगे ,जिनकी प्रवर्ति -
  १-उसकी सत्यवादिता परखने की है ,
 २-यह पता चलने की है कि वह कौन है और जीवन में उसकी स्थिति क्या है ,अथवा 
 ३- उसके शील को दोष लगाकर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुँचाने की है ,चाहे ऐसे प्रश्नों का उत्तर उसे प्रत्यक्षतः अपराध में फंसाने की प्रवर्ति रखता हो ,या उसे किसी शास्ति या समपहरण के लिए उच्छन्न  करता है या प्रत्यक्षतः या परोक्षतः उच्छन्न करने की प्रवर्ति रखता हो.
किन्तु इसके साथ ही अधिनयम संख्या ४ सन २००३ द्वारा धारा १४६ {३}में एक परंतुक अंतःस्थापित किया गया है जो ये है -
"बशर्ते कि बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अभियोजन में अभियोक्त्री  से प्रतिपरीक्षा में उसके सामान्य अनैतिक चरित्र के विषय में प्रश्नों को करने की अनुज्ञा नहीं होगी ."
 साथ ही इसी संशोधन द्वारा धारा १५५ की उपधारा ४ को निकल दिया गया है जो ये कहती थी -
"जबकि कोई मनुष्य बलात्संग या बलात्संग के प्रयत्न के लिए अभियोजित है तब यह दर्शित किया जा सकता है कि अभियोक्त्री साधारणतः व्यभ्चारिणी है."
और कानून का यह कदम पूर्णतः सही  कहा  जायेगा क्योंकि महिला को इस तरह के साक्ष्य से व्यभचारी साबित करना इस पुरुष सत्तात्मक  समाज और स्वयं नारी होकर नारी के दोष ढूँढने  की प्रवर्ति वाली नारियों के समाज  में बहुत आसान है .क्योंकि स्वयं बहुत से सही आचरण  व वेशभूषा वाली नारियां भी इस सच्चाई से इंकार नहीं कर सकतीं कि उन्हें भी कभी न कभी ऐसी दुरूह परिस्थिति से दो-चार होना पड़ता है जिनकी कल्पना भी वे नहीं कर सकती.क्या वरिष्ठ आई .ए.एस  अधिकारी रूपम देओल बजाज के साथ  पुलिस अधिकारी के,पी.एस गिल ने जो किया वह उनके आचरण  या वेशभूषा के कारण किया .
   और फिर ये कहना कि गलत आचरण सुधर का यही उपाय है तो ये तो किसी जानवर  समाज के लिए ही सही कहा जायेगा यहाँ जो कुछ  भी इन लोगों द्वारा किया गया है  उसके लिए भारतीय कानून इन्हें अपराधी की श्रेणी में रखता है भले ही वह किशोरी ऐसे कपडे पहनकर ''आ  बैल मुझे मार" की कहावत चरितार्थ  करती हो किन्तु छेड़छाड़ करने वाले इंसान  हैं जानवर नहीं इसलिए कानून के दायरे में आते हैं और अपराधी ही कहलाने योग्य हैं गलत आचरण पर रोक के हजारों उपाय हैं जिन्हें प्राचीन  समाज में बहिष्कार आदि के द्वारा कार्यान्वित किया जाता था.
   ऐसे में जिन महिलाओं की चेन लुटती है उनके विषय में तो इनके दृष्टिकोण से यही कहना चाहिए कि "चेन चीज़ ही ऐसी है कि कोई लूट ले और फिर गरीबी भुखमरी के देश में कोई सोने चांदी की चेन पहन ही कैसे रही है "किसी के यहाँ लूट-डकैती होती है तो कहना चाहिए "माल ही इतना भर रखा  है कि ये न होता तो क्या होता" 
फिर ऐसे में सभ्यता संस्कृति की दुहाई दी ही क्यों  जाती है ,और ऐसे में विदेशी प्रयटक  जिनकी जीवन शैली यही है उन्हें तो भारत आना  छोड़  ही देना चाहिए क्योंकि यहाँ अपराधी का अपराध नहीं बल्कि पीड़ित का आचरण और वेशभूषा देखी जाती है.
                                       शालिनी  कौशिक  
                                            {कौशल } 

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

ऐसा हादसा कभी न हो

ऐसा हादसा कभी न हो 


१२ जुलाई 2012 -अमर उजाला समाचार पत्र एक ऐसे हादसे की भयावहता से भरा था जो हम सभी के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है.
समाचार था "गैस रिसाव से हुआ वैन  हादसा -पंद्रह  मिनट तक  चली जिंदगी और  मौत  की जंग "
कांधला {प्रबुद्ध नगर}में दिल्ली यम नौत्री  मार्ग पर एलम के पास मंगलवार को चंद मिनट में एक वैन परिवार के १४ लोगों को लील गयी 
कारण गैस रिसाव .
एक ऐसा हादसा जो हम सभी को झकझोर कर रख देने वाला है किन्तु केवल उन परिजनों को छोड़ कर जो इस हादसे के बाद अकेले रह गए हैं 
 शायद  ही  कोई  इस हादसे को याद  रखे  किन्तु ऐसे हादसे भूलने के लिए नहीं  होते बल्कि हमें  सबक सिखाने के लिए होते हैं हम जो आये  दिन  ऐसी गाड़ियों का उपयोग   कर रहे हैं जो गैस से चलती हैं और हमारे बच्चे जो विभिन्न स्कूलों  में पढने  जाते  हैं वहां भी ऐसी  ही गाड़ियाँ उन्हें  लाने  ले  जाने  के लिए लगायी  जाती  हैं जो गैस से चलती हैं और उन गाड़ियों  में बच्चे इस कदर  भरे  जा  रहे  हैं कि यदि  दुर्भाग्यवश  ऐसी कोई घटना  घटने  भी  लगे  तो  उन पर बाहर निकलने  की सोचने का भी समय नहीं हो पायेगा .
साथ ही सभी के दिमाग में ये एक बात भी अवश्य आएगी कि क्या पता गैस किट  में ही कोई कमी रही हो जो ऐसा हादसा पेश आया तो इसका जवाब भी समाचार पत्र में दिया गया है कि "'दिल्ली आर.टी.ओ.कार्यालय  से एप्रूव्ड  थी १४ जिंदगियां लीलने वाली वैन"
मैं क्या कोई भी नहीं चाहेगा कि ऐसा हादसा किसी  के साथ हो किन्तु केवल चाहने से कुछ नहीं होता इसके लिए हमें सच्चे मन से प्रयास रत  होना होगा हमें अपनी गाड़ियों में अपनी जिंदगी की सलामती खुद  तय करनी होगी उनकी देख रेख साज संभाल  पर सतर्क होना होगा और साथ ही स्कूलों की वैन की और भी कड़े रुख अपनाने होंगे ताकि हमारे देश का भविष्य भी सुरक्षा के आकाश में साँस ले सके और ऐसे हादसे से उसे दो-चार न होना पड़े.


अंत में यही कहूँगी कि ईश्वर इस तरह जिंदगी से मुहं मोड़ने वाली इन १४ जिंदगियों की आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों को सांत्वना और ये गहरा दुःख झेलने की सामर्थ्य.
             शालिनी कौशिक 
               {कौशल} 

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||


                                                  
आंसू न किसी के रोक सके धिक्कार तुम्हे है तब मानव |
खुशियाँ न किसी को दे सके धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

ये जीवन परोपकार में तुम गर लगा सके तो धन्य है ,
गर स्वार्थ पूर्ति  में लगे रहो धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

जब बनते खुशियाँ लोगों की सच्ची खुशियाँ तब पाते हो ,
जब छीनो  चैन  किसी का भी धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

न छीनो हक़ किसी का तुम जो जिसका  है उसको दे दो ,
जब लूटपाट मचाते  तुम धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

जब समझे गैर को तुम अपना तब जग अपना हो जाता है,
करते जब अपने को पराया  धिक्कार तुम्हे है तब मानव ||

लायी "शालिनी"धर्मों से  कुछ बाते तुम्हे बताने  को,
न समझ  सके गर अब   भी तुम धिक्कार तुम्हे है तब मानव||

                                                शालिनी कौशिक 
                                                       {कौशल }

क्या आदमी सच में आदमी है ?

''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आदमी में इंसानियत ,...