सोमवार, 26 जून 2017

मीरा कुमार जी को हटाया क्यों नहीं सुषमा जी ?

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विपक्षी दलों ने जब से भाजपा के राष्ट्रपति पद के दलित उम्मीदवार श्री रामनाथ कोविंद के सामने दलित उम्मीदवार के ही रूप में मीरा कुमार जी को खड़ा किया है तब से भाजपा के नेताओं व् भाजपा के समर्थकों के पसीने छूटने लगे  हैं.कभी मीरा कुमार जी के दलित होने को लेकर सोशल मीडिया पर खील्ली उड़ाई जा रही है तो कभी उनके एक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल को लेकर सुषमा स्वराज जी द्वारा व्यर्थ की बयानबाजी ट्विटर पर की जा रही है और ये सब उस घबराहट का परिणाम है जो कि अपने उम्मीदवार की हार जीत को लेकर उपजती है और जबकि सभी जानते हैं कि रामनाथ कोविंद जी की जीत तय है तब भी ये व्यर्थ की बयानबाजी ,सोशल मीडिया का दुरूपयोग ,समझ से परे है .
       मीरा कुमार जी के पति को ब्राह्मण बताकर उनके दलित होने को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है और ये सब हो रहा है उनके पति श्री मंजुल कुमार जी के नाम में शास्त्री शब्द का जुड़ा होना जबकि सभी जानते हैं कि शास्त्री एक उपाधि है जिसे कोई भी शास्त्री की शिक्षा प्राप्त करके हासिल कर सकता है .
       और रही उनके लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल की बात तो सबसे पहले हमें लोकसभा अध्यक्ष के सम्बन्ध में संवैधानिक स्थिति को जान लेना चाहिए -

लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्षभारतीय संसद के निम्नसदन, लोकसभाका सभापति एवं अधिष्ठाता होता है। उसकी भूमिकावेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित किसी भी अन्य शासन-व्यवस्था के वैधायिकीय सभापति के सामान होती है। उसका निर्वाचन लोकसभा चुनावों के बाद, लोकसभा की प्रथम बैठक में ही कर लिया जाता है। वह संसद के सदस्यों में से ही पाँच साल के लिए चुना जाता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपने राजनितिक दल से इस्तीफा दे दे, ताकि कार्यवाही में निष्पक्षता बनी रहे। वर्त्तमान लोकसभा अध्यक्षश्रीमती सुमित्रा महाजन है, जोकि अपनी पूर्वाधिकारी, मीरा कुमार के बाद, इस पद की दूसरी महिला पदाधिकारी हैं।

निर्वाचनसंपादित करें

लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा के सदस्यों के द्वारा किया जाता है। निर्वाचन की तिथि राष्ट्रपति के द्वारा निश्चित की जाती है। राष्ट्रपति के द्वारा निश्चित की गयी तिथि की सूचना लोकसभा का महासचित सदस्यों को देता है। निर्वाचन की तिथि के एक दिन पूर्व के मध्याह्न से पहले किसी सदस्य द्वारा किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव महासचिव को लिखित रूप में दिया जाता है। यह प्रस्ताव किसी तीसरे सदस्य द्वारा अनुमोदित होना चाहिए। इस प्रस्ताव के साथ अध्यक्ष के उम्मीदवार सदस्य का यह कथन संलग्न होता है कि वह अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए तैयार है। निर्वाचन के लिए एक या अधिक उम्मीदवारों द्वारा प्रस्ताव किये जा सकते हैं। यदि एक ही प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मत होता है और यदि एक से अधिक प्रस्ताव प्रस्तुत होते हैं, तो मतदान कराया जाता है। मतदान में लोकसभा के सदस्य ही शामिल होकर अध्यक्ष का बहुमत से निर्वाचन करते हैं।

शक्तियाँ और कार्य


लोकसभा-अध्यक्ष लोकसभा के सत्रों की अध्यक्षता करता है और सदन के कामकाज का संचालन करता है। वह निर्णय करता है कि कोई विधेयकधन विधेयक है या नहीं। वह सदन का अनुशासन और मर्यादा बनाए रखता है और इसमें बाधा पहुँचाने वाले सांसदों को दंडित भी कर सकता है। वह विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव और संकल्पों, जैसे अविश्वास प्रस्तावस्थगन प्रस्तावसेंसर मोशन, को लाने की अनुमति देता है और अटेंशन नोटिस देता है। अध्यक्ष ही यह तय करता है कि सदन की बैठक में क्या एजेंडा लिया जाना है।

वेतन और भत्ते

कार्यकाल अवधि और पदमुक्तिसंपादित करें

अध्यक्ष का कार्यकाल लोकसभा विघटित होने तक होता है। कुछ स्थितियों में वह इससे पहले भी पदमुक्त हो सकता है-   इस सम्बन्ध में भारतीय संविधान का अनुच्छेद ९४ [ग] कहता है कि-वे लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किये गए एक प्रस्ताव द्वारा अपने पद से हटाए जा सकते हैं .

लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर)संपादित करें

लोकसभा अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक सदस्य को अपने अध्यक्ष (स्पीकर) के रूप में चुनती है, जिसे अध्यक्षकहा जाता है। कार्य संचालन में अध्यक्ष की सहायता उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है, जिसका चुनाव भी लोक सभा के निर्वाचित सदस्य करते हैं। लोक सभा में कार्य संचालन का उत्तरदायित्व अध्यक्ष का होता है।
लोकसभा का अध्यक्ष होता है इसका चुनाव लोकसभा सदस्य अपने मध्य मे से करते है। लोकसभा अध्यक्ष के दो कार्य है-
1. लोकसभा की अध्यक्षता करना उस मे अनुसाशन गरिमा तथा प्रतिष्टा बनाये रखना इस कार्य हेतु वह किसी न्यायालय के सामने उत्तरदायी नही होता है
2. वह लोकसभा से संलग्न सचिवालय का प्रशासनिक अध्यक्ष होता है किंतु इस भूमिका के रूप मे वह न्यायालय के समक्ष उत्तरदायी होगा
स्पीकर की विशेष शक्तियाँ
1. दोनो सदनॉ का सम्मिलित सत्र बुलाने पर स्पीकर ही उसका अध्यक्ष होगा उसके अनुउपस्थित होने पर उपस्पीकर तथा उसके भी न होने पर राज्यसभा का उपसभापति अथवा सत्र द्वारा नांमाकित कोई भी सदस्य सत्र का अध्यक्ष होता है
2. धन बिल का निर्धारण स्पीकर करता है यदि धन बिल पे स्पीकर साक्ष्यांकित नही करता तो वह धन बिल ही नही माना जायेगा उसका निर्धारण अंतिम तथा बाध्यकारी होगा
3. सभी संसदीय समितियाँ उसकी अधीनता मे काम करती है उसके किसी समिति का सदस्य चुने जाने पर वह उसका पदेन अध्यक्ष होगा
4. लोकसभा के विघटन होने पर भी उसका प्रतिनिधित्व करने के लिये स्पीकर पद पर कार्य करता रहता है नवीन लोकसभा चुने जाने पर वह अपना पद छोड देता है.
     अब ऐसे में एक आम भारतीय यदि सुषमा जी के ट्वीट को लेकर उनका समर्थन करता है तो उसे उसके लिए संविधान को दरकिनार कर देना चाहिए जो कि इस देश का सर्वोच्च कानून है और जो ये कहता है कि आप लोकसभा का अध्यक्ष स्वयं चुनिए और यदि उसकी कार्यप्रणाली आपको सही प्रतीत नहीं होती है तो उसे हटा दीजिये ,उसके अनुचित बर्ताव को बर्दाश्त करने की ज़रुरत नहीं है .भारतीय संस्कृति में ''शठे शाठ्यम समाचरेत  ''की शिक्षा दी गयी है जो कि यह कहती है कि दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार किया जाये और जब सुषमा जी को मीरा कुमार जी ६ मिनट में ६० बार केवल इसलिए टोकती हैं कि वे सत्ता पक्ष का काला पक्ष उजागर न कर पाएं तो सुषमा जी की ये जिम्मेदारी बनती थी कि तभी तुरंत कार्यवाही कर उन्हें उनके पद से हटवाएं किन्तु उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया और देश को इतने बड़े संकट में फंसे रहने दिया .
     अब सुषमा जी ही हमें बताएं कि हम अब इस स्थिति में क्या कर सकते हैं क्योंकि अब तो उन्हें चुनना या न चुनना हमारे हाथ में है ही नहीं अब तो सब कुछ संविधान ने आपके और आप जैसे माननीयों के हाथ में दे रखा है और हमें आपकी ये ट्वीट्स बता रही हैं कि संविधान की मान्यता पर आप जैसे माननीयों द्वारा जो खतरा उत्पन्न किया जाता है उसके बचाव का कोई साधन हमें संविधान के पुनः संशोधन द्वारा ढूंढना ही होगा क्योंकि ऐसा अन्याय भारत की जनता तो बर्दाश्त नहीं करेगी. आप लोग राजनैतिक महत्वाकांक्षा को लेकर भले ही खून के घूँट पी लें पर हम इस देश को खून के घूँट नहीं पीने देंगे और आपकी तरह अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो कि आप संविधान द्वारा अधिकार मिलने के बावजूद मीरा कुमार जी को अधिकार दे बर्दाश्त करती रही क्योंकि कहा भी है -
''अन्याय को सहना भी अन्याय ही करना है .''

शालिनी कौशिक 
   [  कौशल ]

रविवार, 25 जून 2017

ईद मुबारक



मुबारकबाद सबको दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे ,
महक इस मौके में भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे ,
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मुब्तला आज हर बंदा ,महफ़िल -ए -रंग ज़माने में ,
मिलनसारी यहाँ भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे ,
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मुक़द्दस दूज का महताब ,मुकम्मल हो गए रमजान ,
शमा हर रोशन अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे ,
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रहे मज़लूम न कोई ,न हो मज़रूह हमारे से ,
मरज़ हर दूर अब कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .
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ईद खुशियाँ मनाने को ,ख़ुदा का सबको है तौहफा ,
मिठास मुरौव्वत की भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .
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भुलाकर मज़हबी मुलम्मे ,मुहब्बत से गले मिल लें ,
मुस्तहक यारों का कर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .
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फ़तह हो बस शराफत की ,तरक्की पाए बस नेकी ,
फरदा यूँ हरेक कर दूँ ,जुदा अंदाज़  हैं मेरे .
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फरहत बख्शे फरिश्तों को ,खुदा खुद ही यहाँ आकर ,
फलक इन नामों से भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .
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फ़िरासत से खुदा भर दे ,बधाई ''शालिनी ''जो दे ,
फिर उसमे फुलवारी भर दूँ ,जुदा अंदाज़ हैं मेरे .
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शब्दार्थ -मजलूम -अत्याचार से पीड़ित ,मजरूह-घायल ,मुरौव्वत-मानवता ,मुलम्मे-दिखावे ,मुस्तहक-अधिकारी ,फरदा -आने वाला  दिन ,फरहत-ख़ुशी ,फरिश्तों -सात्विक वृति वाला व्यक्ति। फ़िरासत -समझदारी।
एक बार फिर आप सभी को ईद मुबारक 
शालिनी कौशिक 
[कौशल ]



मंगलवार, 20 जून 2017

कानून पर कामुकता हावी

Navodayatimes
१६ दिसंबर २०१२ ,दामिनी गैंगरेप कांड ने हिला दिया था सियासत और समाज को ,चारो तरफ चीत्कार मची थी एक युवती के साथ हुई दरिंदगी को लेकर ,आंदोलन हुए ,सरकार पलटी ,दुष्कर्म सम्बन्धी कानून में बदलाव हुए लगा अब इस देश में नारी जीवन सुरक्षित होने जा रहा है ,जिस कानून में पहले सामूहिक बलात्संग की सजा मात्र १० वर्ष या आजीवन कारावास थी वही कानून अब अपराधियों को २० वर्ष या उनके प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास देने जा रहा था .मगर ये केवल सोच ही थी .  ये साबित करने के लिए किसी बड़े सबूत की आवश्यकता शायद नहीं कही जाएगी कि देश में नारी जीवन एक आपदा से कम नहीं है और इसके सम्बन्ध में चाहे कोई सरकार आये या चाहे कितना ही कठोर कानून ,नारी जीवन को सुरक्षित नहीं किया जा सकता .
 अभी तीन दिन पहले ही महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने २ दया याचिकाएं ख़ारिज कर दी और दोनों ही दया याचिकाएं रेप के आरोपियों द्वारा की गयी थी उनके द्वारा जो २०-२२ साल के लड़के होने के बावजूद एक ४ साल की बच्ची तक पर दया नहीं कर सकते ,उन पर दया की भी नहीं जानी  चाहिए ,और यही सन्देश दिया हमारे महामहिम ने ,किन्तु क्या असर हुआ ,उनकी दया याचिका ख़ारिज हो गयी किन्तु उसके ठीक २ दिन बाद एक ७ वर्षीय बालिका से ऑटो चालक द्वारा फिर उसी घटना को अंजाम दे दिया गया .यूपी के ग्रेटर नॉएडा में एक युवती के साथ गैंगरेप किया गया .इन सभी का ब्यौरा दे रही हैं निम्न क्लिपिंग्स-

राष्‍ट्रपति ने 2 मामलों में दया याचिका को किया खारिज, जानें मामला...

      वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी  25 जुलाई को अपना पद छोड़ेंगे। लेकिन  पद छोड़ेंने के  एक माह पहले राष्‍ट्रपति ने 2 मामलों में दया याचिका को खारिज कर दिया।
जानें खारिज की गई याचिकाओं के बारें में 
पहला केस 2012 का है, जिसमें चार साल की एक बच्ची का रेप और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी। यह केस  इंदौर है। जिसमें बाबू उर्फ केतन (22), जितेंद्र उर्फ जीतू (20) और देवेंद्र उर्फ सनी (22) ने चार साल की बच्ची का अपहरण कर उसका रेप और हत्या करने का आरोप लगा था, जिसमें सभी दोषी पाए गए हैं।
 दूसरा केस पुणे का है, जिसमें कैब ड्राइवर पर अपने साथी के साथ मिलकर युवती का रेप और हत्या के मामले में दोषी हैं। जिसमें पुरुषोत्म दसरथ बोरेट और प्रदीप यशवंद कोकडे को विप्रों में काम करने वाली एक 22 वर्षिय युवती की हत्या और रेप के मामले में दोषी पाया गया है। इन मामलों में कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
 दोनों केस राष्ट्रपति को अप्रैल और मई में भेजे गए थे। 
     *गुरुग्राम के डूंडाहेड़ा में एक सात साल की बच्ची के साथ एक ऑटो चालक ने कथित तौर पर रेप किया। रेप के बाद बच्ची की हालत गंभीर है। पीड़िता को सफदरजंग हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया है।
पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से रेप के आरोपी ऑटो चालक को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आज उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पीड़ित परिवार डूंडाहेड़ा में रहता है। बताया जा रहा है कि रविवार रात एक ऑटो चालक कमल सिंह बच्ची और उसके 10 साल के भाई को फुसलाकर अपने साथ ले गया। भाई को रास्ते में छोड़कर ऑटो चालक बच्ची को सुनसान जगह पर ले गया। यहां उसने बच्ची से रेप किया।
रेप के बाद आरोपी ने दोनों को उनके घर के पास छोड़ गया। बच्ची की खराब हालत देख कर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद बच्ची को सिविल हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया।
जिसके बाद यहां से उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। पुलिस ने एरिया में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगाली। इसमें बच्ची के भाई ने आरोपी को पहचान लिया।
जिसके बाद चालक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। बच्ची की हालत गंभीर है।
  • * यूपी के ग्रेटर नोएडा में एक महिला के साथ कार में गैंगरेप की वारदात सामने आई है। खबर है कि महिला को आरोपियों ने हरियाणा के सोहना से किडनैप किया। इसके बाद गैगरेप की वारदात को अंजाम देकर ग्रेटर नोएडा के कासना इलाके में फेंक दिया।  ग्रेटर नोएडा पुलिस ने इस पूरे मामले पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
    जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के सोहना की रहने वाली 35 साल की महिला को तीन लोगों ने स्विफ्ट कार से सोमवार की शाम 8 बजे अगवा कर रातभर सड़कों पर घुमाते रहे और गैंगरेप करते रहे। इसके बाद पीड़िता को ग्रेटर नोएडा के कासना इलाके में लाकर फेंक दिया।
    मंगलवार की सुबह जब लोगों की नजर महिला पर पड़ी, तो पुलिस को फोन करके इसकी जानकारी दी और मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ महिला के बयान पर जीरो एफआईआर दर्ज कर लिया है। पुलिस को पूछताछ में पता चला कि पीड़िता भरतपुर राजस्थान की रहने वाली है, जो 10 दिन पहले सोहना आई थी।
    पुलिस के मुताबिक, पीड़िता की मेडिकल जांच कराई जा रही है। इसके बाद ही पीड़िता को सोहना ले जाया जाएगा, क्योंकि वारदात हरियाणा के सोहना में हुई है, इसलिए स्थानीय पुलिस से संपर्क करके उसे जांच सौंपी जाएगी। पुलिस ने बताया कि इस वारजाद के बाद से आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। 
  •   ये घटनाएं स्पष्ट तौर पर यह सन्देश दे रही हैं कि अपराधी अब बेख़ौफ़ हैं उनपर भारतीय कानून का कोई असर अब नहीं है .उनकी साफ तौर पर यह चेतावनी हम सबको दिखाई दे रही है जो कानून के ''सेर पर खुद को सवा सेर '' मान भी रही है और साबित भी कर रही है .ये बात जब सबको दिखाई दे रही है तो कानून के नुमाइंदो को क्यों नज़र नहीं आ रही हैं .दुष्कर्म सम्बन्धी मामलों को सुनने के लिए और उनके त्वरित निबटारो द्वारा इस समस्या पर कुछ लगाम कसने की आशा की जा सकती है अगर सरकार इस ओर ध्यान दे .

  • शालिनी कौशिक 
  •   [कौशल ]



शनिवार, 17 जून 2017

Happy Fathers day - 2017

       
                    

झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में ,

ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं .

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बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ ,

ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं .

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शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे ,

मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं .

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मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें ,

सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं .

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कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर,

सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं .

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जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें ,

अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं .

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                शालिनी कौशिक

                       [कौशल]


शुक्रवार, 16 जून 2017

वकील ज्यादा समझदार वेस्ट यूपी में

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मेरठ बार एसोसिएशन के शपथग्रहण समारोह में प्रदेश के विधायी एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग का समर्थन किया और कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता कर समाधान निकालेंगे .
      बेंच को लेकर 1979 से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता संघर्षरत हैं और इसके लिए वे अपने आर्थिक हितों को तो दरकिनार कर ही रहे हैं साथ ही जिस जनता के न्याय हित की खातिर वे ऐसा कर रहे हैं उससे ही अपने लिए अनाप-शनाप बातें सुन रहे हैं .
      अब तक यह प्रतीत होता था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं को बेंच के लिए सरकार के समर्थन व् न्याय के लिए दर-दर भटक रही जनता के अपर सहयोग की आवश्यकता है और अगर ऐसा हो जाये तो वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच बनते देर नहीं लगेगी ,लेकिन देर से ही सही परतें खुलने लगी हैं ,वास्तविकता नज़र आने लगी है .
        वास्तव में बेंच के लिए आंदोलनरत अधिवक्ताओं में खंडपीठ की स्थापना की जहाँ बात है जैसे कि ''मेरठ '' ,वहां के अधिवक्ता तो जी-जान से जुटे हैं पर उनकी अधीनस्थ व् सहयोगी जिलों की कोर्ट्स के अधिवक्ता इस कार्य में बस पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति में केवल वकीलों के लिए चलायी जा रही योजनाओं से लाभ उठाने हेतु अपना नाम बनाये रखने के लिए कार्य कर रहे हैं .
                 बेंच की स्थापना मेरठ में हो ऐसा वे अधिवक्तागण स्वयं नहीं चाहते क्योंकि किसी के अनुसार तो इतनी पास हाईकोर्ट आने पर लोग बड़ी कोर्ट के वकील पर ही ज्यादा विश्वास रख उसे अपने मुक़दमे सौंप देंगे और इस तरह बड़ी कोर्ट के अधिवक्ता उनके क्षेत्र में आकर उन्ही का काम उनसे छीन लेंगे और किसी के अनुसार छोटी कोर्ट्स में बहुत से धोखेबाज व् अक्षम अधिवक्ता हैं जो पास की हाईकोर्ट का नाजायज फायदा अपने मुवक्किल से उठाएंगे और उन्हें लूटेंगे .
     अब इन्हें कौन बताये कि ये दोनों स्थितियां तो अभी भी विद्यमान हैं और आपकी काबिलियत इसका जवाब है .बड़ी कोर्ट के वकील तो मुवक्किल अभी भी बुला सकते हैं और ये मौका आपके पास भी है यदि आप काबिल हैं तो बड़ी कोर्ट्स में जा सकते हैं .दुसरे धोखेबाज व् अक्षम अधिवक्ता हमारी हाईकोर्ट में भी हैं बस अभी दूरी के कारण वे अपने मुविक्कलों व् उनके स्थानीय वकीलों की पकड़ से बचे हुए हैं जो पकड़ हाईकोर्ट बेंच के आने से उनके हाथ में स्वयं आ जाएगी .
      अब ऐसे में यदि हममें काबिलियत है और हम जनता के न्यायहित के आकांक्षी हैं तो हमें हाईकोर्ट बेंच का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सर्वसम्मति से समर्थन करना होगा अपने क्षुद्र हितों को यदि हम दरकिनार कर सके तभी हम इस पुनीत लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे किन्तु हमें पता है यहाँ लोकतंत्र है और लोकतंत्र में और कुछ हो या न हो सर्वसम्मति किसी भी मुद्दे पर नहीं हो सकती .
    ऐसे में शत-प्रतिशत रूप से ये कहा जा सकता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच कभी भी नहीं बन सकती .इसके लिए हम केंद्र या राज्य सरकार को दोषी ठहराने के बिलकुल भी हक़दार नहीं हैं क्योंकि जब वकीलों में ही एकजुटता नहीं तो बहरी तत्वों को दोष देना गलत है .ऐसे में हम केवल यही सोचकर संतोष कर सकते हैं -
'' न नौ मन तेल होगा ,न राधा नाचेगी .'

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 8 जून 2017

नारी :एक कामयाब अपराधी

ईरान की संसद और खोमैनी के मकबरे पर इस्लामिक स्टेट के हमलों में 12 की मौत

ईरान की संसद और खोमैनी के मकबरे पर इस्लामिक स्टेट के हमलों में 12 की मौत

 ईरान की संसद और यहां के क्रांतिकारी संस्थापक रूहुल्लाह खोमैनी के मकबरे पर बुधवार को बंदूकधारियों और आत्मघाती हमलावरों ने सुनियोजित हमले किए, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई. इस्लामिक स्टेट समूह ने हमले की जिम्मेदारी ली है.

लगातार कई घंटे तक की गई गोलीबारी में दर्जनों लोग घायल हुए हैं. आईएस ने अपनी अमाक एजेंसी के जरिये एक वीडियो जारी किया है, जिसमें हमलावर भवन के भीतर नजर आ रहे हैं. हमले के जारी रहते हुए जिम्मेदारी लेने का यह दुर्लभ मामला है. पुलिस ने बताया कि हमला शुरू होने के करीब पांच घंटे बाद अपराह्न तीन बजे के करीब तक सभी हमलावरों को मार गिराया गया. समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार तेहरान के संसद परिसर पर चार बंदूकधारियों ने राइफल और पिस्तौल से हमला किया. इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक वे महिलाओं के परिधान में थे और पर्यटकों के प्रवेश द्वार से घुसे थे. करीब-करीब उसी समय शहर के दक्षिण क्षेत्र में स्थित खोमैनी के मकबरे के परिसर में तीन-चार सशस्त्र हमलावर घुस आए, उन्होंने कथित तौर पर एक माली की हत्या कर दी इस हमले में कई और लोग घायल हो गए. खोमैनी ने वर्ष 1979 में इस्लामिक आंदोलन की अगुवाई की थी. ईरान की आपात सेवाओं के अनुसार दो हमलों में कम से कम 12 लोग मारे गए और 39 घायल हुए.
स्थानीय मीडिया के अनुसार दो हमलावरों ने मकबरे के बाहर खुद को उड़ा लिया. हमलावरों में कम-से-कम एक महिला शामिल थी. एक अन्य ने संसद भवन की चौथी मंजिल पर खुद को उड़ा लिया. हमले के समय संसद का सत्र चल रहा था और फुटेज में आसपास के कार्यालय की भवनों में मुठभेड़ के बावजूद कामकाज चलते दिख रहा है.
   ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है इस समाचार में जो आज तक न हुआ हो और आगे नहीं होगा लेकिन अगर कुछ विशेष है तो वह है हमलावरों का महिलाओं की वेशभूषा में होना और हमलावरों में एक महिला का भी शामिल होना ,महिला का भी ऐसा नहीं है कि वह पहली बार किसी ऐसी घटना में शामिल हो रही हो लेकिन आज जो स्थिति बनती जा रही है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि महिलाओं की विशेष स्थिति को नज़रअंदाज करना होगा साथ ही इस मासूम चेहरे के पीछे छिपी कुटिलता को भी पहचानना ज़रूरी होगा .
   महाराष्ट्र इस बात का गवाह है कि २०१० से लेकर २०१२ तक भारतीय राज्यों में बहुत सी महिलाएं भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत गिरफ्तार की गयी हैं .नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार ९०,८८४ महिलाएं तीन साल की अवधि में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत गिरफ्तार की गयी हैं .आंध्र प्रदेश में ५७,४०६ महिलाएं ,४९,३३३ महिलाएं मध्य प्रदेश में ,४९,०६६ महिलाएं तमिल नाडु में और ४१,८७२ महिलाएं गुजरात में अपराधी के रूप में गिरफ्तार की गयी हैं .महिलाओं का अपराध के क्षेत्र में सक्रीय होना ही आज महिला पुलिस की संख्या में बढ़ोतरी का  कारण है .
   हमें आज भी याद है २१ मई १९९१ को रात के १० बजकर २० मिनट का वह समय जब रेडियो  पर समाचार एकदम बंद हुए और समाचारवाचक ने तमिलनाडु के पेरम्बुदूर में एक आत्मघाती हमले में हम सबके प्रिय राजीव गाँधी जी के मारे जाने की सूचना दी और इस आत्मघाती हमले में भी एक महिला '' धानु'' शामिल थी .
       मोनिका बेदी का अंडरवर्ल्ड सम्बन्ध ,ममता कुलकर्णी का ड्रग्स मामले में भगोड़ा घोषित किया जाना ,जगह जगह बैंकों से महिलाओं द्वारा पैसे छीनकर भागना सब देख रहे हैं जान रहे हैं .
    बचपन में एक गाना सुनते थे -
'' जवान हो या बुढ़िया ,
 या नन्हीं सी गुड़िया 
  कुछ भी हो औरत 
 ज़हर की है पुड़िया .''
और इस पर चिढ जाते थे किन्तु धीरे धीरे नारी का वह रूप भी देखा जो वाकई जहरीला है .दहेज़ जो हमारे समाज का कलंक है ,कोढ़ है उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदार महिला ही है ,दामाद सास ससुर को कष्ट कम ही देते होंगे किन्तु बहु सास ससुर का जीना ज़रूर दुश्वार कर देती है.
  सब देख रहे हैं आज नारी हर दिशा में हर क्षेत्र में नाम ऊँचा कर रही है फिर अपराध में ही क्यों पीछे रहे .सब कहते हैं कि '' हर कामयाब मर्द के पीछे किसी औरत का हाथ होता है '' तो सच ही कहते हैं आज हर कामयाब बदमाश का साथ देने को नारी कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही है और यह कह रही है -
''तू जहाँ जहाँ चलेगा ,मेरा साया साथ होगा .''

शालिनी कौशिक 
   [कौशल ]

मंगलवार, 6 जून 2017

...क़त्ल कर देता .

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अगर बिन दर्द के अपने मुझे तू क़त्ल कर देता ,
खुदा अपने ही हाथों से ये तेरी सांसें ले लेता ,
जन्म मेरा ज़मीं पर चाहा कब कभी किसने
जुनूनी कोई भी बढ़कर कलम ये सर ही कर देता .
................................................................
दिलाओ मुझको हर तालीम हवाले फिर कहीं कर दो ,
भला अपने जिगर का टुकड़ा कोई ऐसे दे देता ,
तड़प जाती हैं रूहें भी हकीकत सोच कर ऐसी
मोहब्बत तेरी बेटी को कोई तुझसी नहीं देता .
............................................................
लुटाकर के जहाँ अपना हैं तुमने बेटियां पाली ,
लुटे वो और घर जाकर ये कैसे देख तू लेता ,
जमाना कितना ज़ालिम है ये जाने हैं जहाँ वाले
नहीं ऐसे में बेटी को जनम का दर्द है देता .
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खिलाया अपने आँगन में जिसे नन्हीं चिरैया सी ,
उसे वो बाज़ के हाथों परोसकर नहीं देता ,
तेरी आँखों का जो तारा ,तेरी जो गोद की गुड़िया
वो तड़पे एक-एक दाने को सहन तू कैसे कर लेता .
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ज़माने ने भरे हैं दर्द गहरे जिसके जीवन में ,
उसे इस धरती पर लाकर नहीं तू और दुःख देता ,
तभी तो ''शालिनी''जाने तुम्हारी बात मन की ये
खुदा से पहले ही उसको तू बढ़कर क़त्ल कर देता .
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शालिनी कौशिक
[कौशल]

मीरा कुमार जी को हटाया क्यों नहीं सुषमा जी ?

विपक्षी दलों ने जब से भाजपा के राष्ट्रपति पद के दलित उम्मीदवार श्री रामनाथ कोविंद के सामने दलित उम्मीदवार के ही रूप में मीरा कुमार जी...