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रविवार, 20 मई 2012

एक नमन राजीव जी को


एक  नमन  राजीव  जी  को  आज उनकी पुण्यतिथि के  अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि राजीव जी आयें और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएँ क्योंकि ये बच्चों की समझ थी कि जो जल्दी से आकर कुर्सी पर बैठ जायेगा वही प्रधानमंत्री हो जायेगा.तब हमारे दिमाग की क्या कहें वह तो उनके व्यक्तित्व पर ही मोहित था जो एक शायर के शब्दों में यूँ था-
''लताफत राजीव गाँधी,नफासत राजीव गाँधी ,
         थे सिर से कदम तक एक शराफत राजीव गाँधी ,
नज़र आते थे कितने खूबसूरत राजीव गाँधी.''
राजीव जी का  जन्म २० अगस्त १९४४ को हुआ था और राजनीति से कोसों दूर रहने वाले राजीव जी अपनी माता श्रीमती इंदिरा जी के  कारण राजनीति में  आये और देश को पंचायत राज और युवा मताधिकार जैसे उपहार उन्होंने दिए .आज  उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें याद करने से स्वयं को नही रोक पाई किन्तु जानती हूँ कि राजीव जी भी राजनीति में आने के कारण बोफोर्स जैसे मुद्दे ी अपने माथे पर लगाये २१ मई १९९१  को एक आत्मघाती हमले का शिकार होकर हम सभी को छोड़ गए आज भी याद है वह रात जब १०.२० मिनट पर पापा कहीं बाहर से आकर खाना खा रहे थे और  हम कैरम खेल रहे थे कि विविध भारती  का  कार्यक्रम छाया गीत बीच में  बंद हुआ और जैसे ही एक उद्घोषक ने कहा ,''अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमेटी के अध्यक्ष....''और इससे पहले कि वह कुछ बोलता कि पापा बोले कि राजीव गाँधी की हत्या हो गयी हम चीख कर पापा से क्या लड़ते क्योंकि अगले पल ही यह समाचार उद्घोषक बोल रहा था और हमारा राजनीति  से सम्बन्ध तोड़ रहा था राजीव जी के साथ हमने राजनीति में रूचि को भी खो दिया बस रह गयी उनकी यादें जो हम आज यहाँ आप सभी से शेयर  कर रहे हैं हालाँकि जानते हैं कि ब्लॉग जगत में अधिकांश उनके खिलाफ हैं किन्तु हम जिनसे आज तक  जुड़े हैं वे राजीव जी ही थे और वे ही रहेंगे.
श्रीमती मुमताज़ मिर्ज़ा के शब्दों में -
''रहबर गया,रफीक गया,हमसफ़र गया,
राजीव पूरी कौम को मगमून कर गया.
सदियाँ भुला सकेंगी न उसके कमाल को,
राजीव चंद सालों में वो काम कर गया.''


शालिनी कौशिक
                      

रविवार, 15 अप्रैल 2012

नारियां भी कम भ्रष्ट नहीं.


नारियां भी कम भ्रष्ट नहीं.

10 Most Corrupt Indian Politicians10 Most Corrupt Indian Politicians                              दिल्ली  एम्.सी.डी. के चुनाव  में महिलाओं को ५०%आरक्षण दिया गया है और ये कयास  लगाये  जा  रहे  हैं  कि शायद   इस तरह भ्रष्टाचार को कम करने में मदद  मिलेगी  जबकि  मेरे  विचार  में ये कोरी कल्पना मात्र है क्योंकि भ्रष्टाचार का किसी से भी दूर  या पास का रिश्ता नहीं है वह नर   हो या नारी किसी के लिए भी पराये या अपने का भाव नहीं रखता है जो भी इसे अपना मानता है वह उससे ही जुड़ जाता है.ऊपर  मैंने  जिन  भारतीय नेत्रियों के चित्र यहाँ संकेत मात्र हेतु लगाये हैं ये भी नारी हैं और इनके जैसी और भी बहुत सी नारियां है  जो इस पुण्य कार्य  में लगी हैं.भला  हम नारियों को कम भ्रष्ट कहकर क्यों हर  काम की तरह यहाँ भी उनकी क्षमता को कम आंकते हैं.
   और इस सच्चाई से भी हम इंकार नहीं कर सकते कि कितनी ही गृहणियां  अपने पतियों को भ्रष्टाचार  के लिए उकसाती हैं और अपनी इच्छाओं को पूरा करने हेतु दबाव डालती हैं.
              फिर भी मैं इस प्रयास की तारीफ ही करूंगी की आखिर नारियों को आगे बढ़ने  के लिए सरकार  ने कुछ स्वस्थ पहल तो की अब लोगों की आकांक्षाओं पर खरी उतरना  नारियों के ऊपर है और मैं आशा करती हूँ वे अपने से की जा रही आशाओं पर खरी उतरेंगी.
                       अग्रिम शुभकामनायें.
                                शालिनी कौशिक 
                                         {कौशल}

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

मंज़िल पास आएगी.

मिशन लन्दन ओलम्पिक हॉकी गोल्ड 
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हौसले कर बुलंद अपने ,मंज़िल पास आएगी,
जोश भर ले दिल में अपने मंज़िल पास आएगी.

तक रहा है बैठकर क्यों भागती परछाइयाँ ,
उठ ज़रा बढ़ ले तू आगे मंज़िल पास आएगी.

दूसरों का देखकर मुंह न पायेगा फ़तेह कभी ,
रख ज़रा विश्वास खुद पर मंज़िल पास आएगी.

भूल से भी मत समझना खुद को तू सबसे बड़ा,
सर झुका मेहनत के आगे मंज़िल पास आएगी.

गर नशा करना है तुझको चूर हो जा काम में ,
लक्ष्य का पीछा करे तो मंज़िल पास आएगी.

''शालिनी'' कहती है तुझको मान जीवन को चुनौती ,
बिन डरे अपना ले इसको मंज़िल पास आएगी.

                              शालिनी कौशिक 
                                    [कौशल ]

बृहस्पतिवार, 5 अप्रैल 2012

रिश्ते







कभी हमारे मन भाते हैं,
     कभी हैं इनसे दिल जलते,
कभी हमें ख़ुशी दे जाते हैं,
      कभी हैं इनसे गम मिलते,
कभी निभाना मुश्किल इनको,
     कभी हैं इनसे दिन चलते,
कभी तोड़ देते ये दिल को,
      कभी होंठ इनसे हिलते,
कभी ये लेते कीमत खुद की,
      कभी ये खुद ही हैं लुटते,
कभी जोड़ लेते ये जग को,
     कभी रोशनी से कटते,
कभी चमक दे जाते मुख पर,
     कभी हैं इनसे हम छिपते,
कभी हमारे दुःख हैं बांटते,
     कभी यही हैं दुःख देते,
इतने पर भी हर जीवन के प्राणों में ये हैं बसते,
और नहीं कोई नाम है इनका हम सबके प्यारे''रिश्ते''
                   शालिनी  कौशिक 


बुधवार, 28 मार्च 2012

बढ़ चलो ए जिंदगी


बढ़ चलो ए जिंदगी
                            
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हर अँधेरे को मिटाकर बढ़ चलो ए जिंदगी
आगे बढ़कर ही तुम्हारा पूर्ण स्वप्न हो पायेगा.




गर उलझकर ही रहोगी उलझनों में इस कदर,
डूब जाओगी भंवर में कुछ न फिर हो पायेगा.




आगे बढ़ने से तुम्हारे चल पड़ेंगे काफिले,
कोई अवरोध तुमको रोक नहीं पायेगा.


तुमसे मिलकर बढ़ चलेंगे संग सबके होसले,
जीना तुमको इस तरह से सहज कुछ हो पायेगा.


संग लेकर जब चलोगी सबको अपने साथ तुम,
चाह कर भी कोई तुमसे दूर ना हो पायेगा.


जुड़ सकेंगे पंख उसमे आशा और विश्वास के ,
''शालिनी'' का नाम भी पहचान नयी पायेगा.


      भारतीय हॉकी टीम के हौसले बुलंद करने में लगी शिखा कौशिक जी की एक शानदार प्रस्तुति को यहाँ आप सभी के सहयोग हेतु प्रस्तुत कर रही हूँ आशा है आप सभी का इस पुनीत कार्य में शिखा जी को अभूतपूर्व सहयोग अवश्य प्राप्त होगा.उनकी प्रस्तुति के लिए इस लिंक पर जाएँ-


हॉकी  हमारा राष्ट्रीय खेल 
        
            शालिनी कौशिक 




  

बृहस्पतिवार, 22 मार्च 2012

हे!माँ मेरे जिले के नेता को सी .एम् .बना दो.

हे!माँ  मेरे जिले के नेता  को  सी .एम् .बना  दो.

 

          आज के समाचार पत्रों में जब हमने बिजली के बारे में मुख्यमंत्री जी के निर्देश पढ़े तो यही विचार मन में तेजी से उभरे.निर्देश थे-
१-बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए शाम को ६ बजे से रात के १०  बजे तक बिना रूकावट बिजली की उपलब्धता.
२-इटावा, कन्नौज और रामपुर को २४ घंटे बिजली.
      पहला निर्देश तो परीक्षार्थियों की सुविधा की दृष्टि से निष्पक्ष निर्देश के रूप में चिन्हित किया जा सकता है किन्तु कमी  ये है की ये समय तो उनकी पढाई की आवश्यकता को देखते हुए बहुत कम है.रात्रि में जब पढाई का सबसे महत्वपूर्ण समय है तब उनकी पढाई के लिए २४ घंटे बिजली का वादा करने वाले सपा सरकार  क्या इंतजाम  कर  रही है और ये निर्देश केवल २० अप्रैल तक हैं और वे भी बोर्ड परीक्षा को दृष्टिगत  रखते  हुए 29 मार्च  से जो विश्व विद्यालय  परीक्षा आरम्भ  हो रही है उसके लिए मुख्यमंत्री क्या अलग  से कुछ  बिजली की व्यवस्था करने की सोच  रहे हैं?
             पर जो निर्देश मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली  को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के समकक्ष खड़े कर रहे हैं वह है उनके गृहजिले इटावा आदि को २४ घंटे बिजली के निर्देश.ये निर्देश देखते हुए तो मन यही कह रहा है-
हे!मैय्या मेरे जिले के नेता को मुख्यमंत्री बना दो या मुझे  ही  पद पर विराजमान करा दो कम से कम बिजली के दर्शन तो होंगे.


     शालिनी कौशिक [कौशल]



रविवार, 18 मार्च 2012

क्या यही लोकतंत्र है?

क्या यही लोकतंत्र है?
NULL Indians walk on a railway track in Mumbai, India, Thursday , March 15, 2012. Indian Railways Minister Dinesh Trivedi announced the first railway fare hike in eight years Wednesday, only to be shot down moments later by Congress party leader Mamata...

अमेरिका के  राष्ट्रपति अब्राहम  लिंकन की सर्वप्रसिद्ध परिभाषा  इस प्रकार है-
"प्रजातंत्र जनता का,जनता द्वारा तथा जनता के लिए शासन है."
                 
            और आज भारत में यही जनता शासन कर रही है .आज से नहीं बल्कि २६ जनवरी १९५० से जिस दिन हमारा गणतंत्र लागू हुआ था किन्तु क्या हम वास्तव  में इस शासन को अपने यहाँ महसूस  कर सकते हैं?शायद नहीं कारण साफ है जिन दलों के आधार पर हम अपने प्रतिनिधि  चुन  कर सरकार  बनाते  हैं जब उन दलों में ही लोकतंत्र नहीं है तो हम कैसे सच्चा लोकतंत्र अपने देश में कह सकते हैं?
              माननीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी जी ने इसबार  पूरे आत्मविश्वास से रेल बजट प्रस्तुत किया किन्तु उन्हें बदले में उन्ही के दल तृणमूल की प्रमुख ममता बैनर्जी  ने रेल किराया बढ़ाने को लेकर पद से इस्तीफा देने का फरमान जारी कर दिया .
           मैं पूछती  हूँ ममता जी से क्या उन्हें ऐसा करने का हक़ था ?जब दिनेश त्रिवेदी जी रेल मंत्री हैं और अपना बजट सदन में प्रस्तुत कर चुके हैं तो क्या सदन जिका कार्य उस पर विचार करना है क्या इस सम्बन्ध में निर्णय लेने  में अक्षम था?
       अब वे मुकुल राय जी का नाम इस पद हेतु प्रस्तावित कर रही हैं क्या उनके किसी कार्य को अपने सिद्धांतों के खिलाफ होने  पर क्या उनसे इस्तीफ़ा नहीं मांगेगी?क्या इस तरह वे स्वयं को भारतीय लोकतंत्र से ऊपर नहीं मानकर चल रही हैं?इस समय  दिनेश त्रिवेदी जी उनके अधीनस्थ पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि भारतीय संविधान के महत्व पूर्ण केन्द्रीय मंत्री का पद भार संभाले हुए हैं और ऐसे में रेल बजट में क्या कमी है क्या जनता के साथ गलत हो रहा है ये देखना सदन की जिम्मेदारी है और ममता जी को ये कार्य उन्ही पर छोड़ देना चाहिए .अन्यथा हमें यही कहना होगा कि -
''लोकतंत्र मूर्खों का,मूर्खों  द्वारा और मूर्खों के लिए शासन है.''


शालिनी  कौशिक 
{कौशल}